पश्चिम बंगाल के चुनाव कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त
एस.वाई. कुरैशी ने चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 2:11 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने गंभीर आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में आयोजित चुनाव कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं। कोलकाता में हासिम अब्दुल हलीम मेमोरियल लेक्चर के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें संदेह है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव कानूनी रूप से सही थे या नहीं। इस बात पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वह यह बात पहले भी कई बार कह चुके हैं और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि अदालत उचित निर्णय लेगी।
कुरैशी ने आगे कहा कि चुनाव के कुछ हिस्से शायद मान्य हो सकते हैं, लेकिन जहां बहुसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं को हटाए जाने का संदेह है, वहां पुन: जांच होनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो पुनर्मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) स्वयं पूरा चुनाव आयोग नहीं हैं। नियमों के अनुसार निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाने चाहिए और यदि यह संभव न हो, तो चुनाव आयोग के तीन सदस्यों के बीच बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि CEC के अकेले के निर्णय अंतिम नहीं हो सकते।
यह विवाद तब सामने आया है जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा एकतरफा लिए गए विभिन्न निर्णयों के खिलाफ कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। कुरैशी ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया न तो सरल थी और न ही पारदर्शी। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का उपयोग गुप्त रूप से नागरिकता की जांच करने के लिए किया गया था।
मतदाताओं के अधिकारों के बारे में बात करते हुए कुरैशी ने कहा कि मतदाताओं को अपने मतदान के अधिकार के लिए भीख नहीं मांगनी चाहिए। अतीत में ऐसी परंपरा थी कि प्रत्येक मतदाता के घर मतदाता कार्ड पहुंचाए जाते थे और उन्हें मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए मोलभाव करने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। वर्तमान में इस मामले में कई प्रश्न खड़े हुए हैं जो सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं। कुरैशी ने विश्वास व्यक्त किया कि अदालत का फैसला आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कहां गलती हुई थी और क्या सही था।
कुरैशी द्वारा किए गए इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री दिलीप घोष ने शुक्रवार को कहा कि यह सरकार 6-7 महीने से सत्ता में है और लोग खुश हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं क्योंकि शायद उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार परिणाम नहीं मिला है। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि लोगों के फैसले और चुनी हुई सरकार को स्वीकार करना ही सही निर्णय है, अन्यथा विरोध करने वालों के लिए आगे का रास्ता बहुत कठिन होगा।
एस.वाई. कुरैशी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में सेवा दे चुके हैं। उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग के प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर काम किया था।
पटाखों के शोर से सुनने की शक्ति स्थायी रूप से नष्ट हो सकती है
भारत में पटाखों के लिए 125 डेसिबल की कानूनी सीमा है, लेकिन पास से शोर बढ़ सकता है
पारिवारिक इतिहास में कैंसर हो तो जीन टेस्टिंग के जरिए अगली पीढ़ी के जोखिम को जानें
माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों में कम उम्र में कैंसर होने से बच्चों में जोखिम बढ़ सकता है
माइकल क्लिंगर ने कोचिंग करियर और भारत में महिला क्रिकेट के समर्थन पर चर्चा की
गुजरात जायंट्स के कोच माइकल क्लिंगर ने भारत में महिला क्रिकेट के बढ़ते क्रेज और अपने अनुभवों के बारे में बात की