पटाखों के शोर से सुनने की शक्ति स्थायी रूप से नष्ट हो सकती है
भारत में पटाखों के लिए 125 डेसिबल की कानूनी सीमा है, लेकिन पास से शोर बढ़ सकता है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 7:01 · अपडेट सुबह 7:07 · 3 मिनट का पाठ
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दिवाली के त्योहार के दौरान फोड़े जाने वाले पटाखों का जोरदार शोर क्षणिक आनंद दे सकता है, लेकिन यह कानों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है। अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, पटाखों के तीव्र शोर के कारण व्यक्ति की सुनने की शक्ति छिन सकती है। भारत में पटाखों के शोर के लिए कानूनी सीमा 125 डेसिबल निर्धारित की गई है, लेकिन जब कोई व्यक्ति पटाखों के बहुत करीब होता है, तो यह शोर निर्धारित सीमा से काफी अधिक बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पटाखों के जोरदार धमाकों से कान का पर्दा फट सकता है और कान के अंदरूनी हिस्से में स्थित हेयर सेल्स (बाल जैसी कोशिकाएं) क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि एक बार ये हेयर सेल्स नष्ट हो जाने के बाद दोबारा नहीं बनते, जिससे सुनने की क्षमता पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है और व्यक्ति स्थायी रूप से बहरा हो सकता है।
मैसूर स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार सिंह ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके अनुसार, पटाखों के शोर का मापन आमतौर पर चार मीटर की दूरी पर किया जाता है। यदि पटाखों से दूरी घटाकर आधी कर दी जाए, तो शोर में छह डेसिबल की वृद्धि होती है। इस गणना के अनुसार, जिस पटाखे का शोर चार मीटर पर 125 डेसिबल होता है, वह मात्र आधे मीटर की दूरी पर 143 डेसिबल तक पहुँच सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार, वयस्कों के लिए अचानक होने वाले तीव्र शोर की सहनशक्ति 140 डेसिबल तक होती है, जबकि बच्चों के लिए यह सीमा काफी कम है। बच्चों के लिए 120 डेसिबल का शोर भी जोखिम भरा साबित हो सकता है, जो दर्शाता है कि बच्चों के कान वयस्कों की तुलना में अधिक संवेदनशील होते हैं और उन्हें नुकसान होने की संभावना अधिक रहती है।
इन जोखिमों से बचने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। पटाखे फोड़ते समय व्यक्ति को कम से कम चार से पांच मीटर की दूरी बनाए रखनी चाहिए। विशेष रूप से बच्चों के कानों की सुरक्षा के लिए उन्हें फोम ईयरप्लग या ईयरमफ पहनाना चाहिए। आमतौर पर लोग कान में रुई (cotton) डालते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार रुई शोर के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं करती है, इसलिए ईयरप्लग का उपयोग करना अधिक उचित है।
पटाखे फोड़ने के बाद यदि कान में घंटी बजने जैसी आवाज आए, कान में दर्द हो या सुनने की क्षमता कम महसूस हो, तो तुरंत ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। यदि ऐसी समस्या 24 से 48 घंटे तक बनी रहती है, तो आगे के नुकसान को रोकने के लिए तुरंत आवश्यक चिकित्सा जांच कराना अनिवार्य है।
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