भारत और यूरोपीय संघ के बीच 93.5 अरब यूरो के होराइजन प्रोग्राम पर समझौता
वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफलतापूर्वक संपन्न
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 7:23 · 4 मिनट का पाठ
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 93.5 अरब यूरो के फ्लैगशिप रिसर्च और इनोवेशन प्रोग्राम 'होराइजन यूरोप' में नई दिल्ली के जुड़ाव को लेकर बातचीत पूरी कर ली है। यह निर्णय दोनों पक्षों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह महत्वपूर्ण कदम ऐसे समय में आया है जब भारत और 27 देशों के इस समूह के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर होने वाले हैं, जिससे 2 अरब लोगों का बाजार तैयार होगा।
यूरोपीय संघ के अनुसार, होराइजन यूरोप प्रोग्राम में भारत का जुड़ाव वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करेगा और अनुसंधान में नए अवसर पैदा करेगा। इस जुड़ाव को अगले पांच वर्षों के लिए दोनों पक्षों के व्यापक रणनीतिक एजेंडे का एक हिस्सा माना जा रहा है। इससे यूरोप के शोधकर्ताओं, व्यवसायों और अनुसंधान संस्थानों को भारतीय भागीदारों के साथ मिलकर काम करने और स्थायी वैज्ञानिक एवं तकनीकी संबंध स्थापित करने के अधिक अवसर मिलेंगे।
जब इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और दोनों पक्षों द्वारा आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी, तब भारत के शोधकर्ता और संस्थान सीधे होराइजन यूरोप से वित्त पोषण (फंडिंग) प्राप्त कर सकेंगे। वे प्रोग्राम के 'पिलर II: ग्लोबल चैलेंजेस एंड यूरोपियन इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस' के तहत सहयोगी परियोजनाओं का नेतृत्व भी कर सकेंगे। यह इस प्रोग्राम का सबसे बड़ा हिस्सा है, जो स्वास्थ्य, डिजिटल, उद्योग, अंतरिक्ष, जलवायु, ऊर्जा और बायो-इकोनॉमी जैसे सामाजिक और तकनीकी मुद्दों पर काम करने वाले बहुराष्ट्रीय अनुसंधान और नवाचार प्रोजेक्ट्स को फंड प्रदान करता है।
EU ने कहा है कि इस कदम से यूरोपीय और भारतीय भागीदार अपनी विशेषज्ञता को एकजुट कर सकेंगे, नई तकनीक विकसित कर सकेंगे और साझा समस्याओं का समाधान निकाल सकेंगे। होराइजन यूरोप के तहत गैर-EU देशों को दिया जाने वाला 'जुड़ाव' (Association) सहयोग का सबसे करीबी स्वरूप है। यह जुड़े हुए देशों के संस्थानों को समझौते में शामिल प्रोग्राम के हिस्सों में EU के समकक्षों की तरह समान शर्तों पर भाग लेने की अनुमति देता है। बदले में, जुड़े हुए देश प्रोग्राम में वित्तीय योगदान देते हैं।
बातचीत पूरी होने के बाद अब समझौते पर हस्ताक्षर करने का रास्ता साफ हो गया है। दोनों पक्ष जनवरी में औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और EU ने फरवरी 2026 में होराइजन प्रोग्राम पर प्रारंभिक चर्चा शुरू की थी और जुलाई में औपचारिक बातचीत शुरू हुई थी।
भारत और EU के बीच वैज्ञानिक सहयोग 2001 में हुए वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग समझौते पर आधारित है, जिसे 2030 तक बढ़ाया गया है। इसके अलावा, 27 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में अपनाए गए 'जॉइंट EU-इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक एजेंडा 2030' में अनुसंधान और नवाचार अभिन्न अंग हैं। EU-इंडिया ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल द्वारा यह साझेदारी और मजबूत हुई है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर्स, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और 6G जैसे डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग को आसान बनाती है।
डिजिटल कौशल के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए पिछले फरवरी में भारत में पहले 'यूरोपीय लीगल गेटवे ऑफिस' की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य ICT क्षेत्र में EU में सुरक्षित और कानूनी गतिशीलता को सुगम बनाना है। होराइजन यूरोप प्रोग्राम 2021 से 2027 तक चलेगा, जिसका कुल बजट 93.5 अरब यूरो है।
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