पारिवारिक इतिहास में कैंसर हो तो जीन टेस्टिंग के जरिए अगली पीढ़ी के जोखिम को जानें
माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों में कम उम्र में कैंसर होने से बच्चों में जोखिम बढ़ सकता है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 6:54 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
यदि परिवार के किसी सदस्य को कैंसर हुआ हो, तो अगली पीढ़ी के सदस्यों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेष रूप से जब माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदारों को कम उम्र में किसी खास तरह का कैंसर हुआ हो, तो इस बात को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे परिवारों में कैंसर से जुड़े जीन (gene) की जांच कराकर अगली पीढ़ी पर मंडरा रहे जोखिम का पहले से ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस जांच से समय पर स्क्रीनिंग शुरू करने और कुछ मामलों में कैंसर के जोखिम को कम करने के विकल्पों को चुनने में मदद मिलती है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, एक अध्ययन दर्शाता है कि दुनिया में कैंसर के लगभग 5 से 10 प्रतिशत मामलों में माता-पिता से मिले हानिकारक जीन परिवर्तनों की भूमिका होती है। हालांकि, कैंसर के अधिकांश मामलों में बढ़ती उम्र, तंबाकू का सेवन, पर्यावरणीय कारक, आहार और जीवन के दौरान कोशिकाओं में होने वाले बदलाव जैसे कारण अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
जांच के दौरान यदि जीन में परिवर्तन पाया जाता है, तो वह जोखिम बच्चों तक पहुंच सकता है। कैंसर से जुड़े कुछ जीन परिवर्तन माता-पिता द्वारा बच्चों में स्थानांतरित किए जा सकते हैं। ब्रेस्ट (स्तन) और ओवरी (अंडाशय) कैंसर से जुड़े BRCA 1-2 ऐसे ही जीन हैं। यदि इन जीन में हानिकारक बदलाव पाए जाते हैं, तो उनके संतानों तक पहुंचने की संभावना 50 प्रतिशत होती है। हालांकि, जीन परिवर्तन मिलने का मतलब यह नहीं है कि कैंसर होना निश्चित है, लेकिन इससे बीमारी होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी सलाहकार डॉ. पल्लवी रेड्डी के अनुसार, कैंसर के आनुवंशिक मामले तुलनात्मक रूप से कम होते हैं। इसलिए, परिवार में किसी को कैंसर हुआ हो तो घबराने के बजाय यह देखना जरूरी है कि कैंसर किस प्रकार का था और किस उम्र में हुआ था। ब्रेस्ट, ओवरी, पैनक्रियाज (स्वादुपिंड) और प्रोस्टेट कैंसर जैसे प्रकारों में आनुवंशिक कारणों की भूमिका हो सकती है। यदि परिवार में एक से अधिक करीबी रिश्तेदारों को, खासकर कम उम्र में इस तरह के कैंसर हुए हों, तो जेनेटिक काउंसलिंग करानी चाहिए।
डॉ. रेड्डी ने आगे बताया कि यदि जीन टेस्टिंग में ऐसे हानिकारक परिवर्तन पाए जाते हैं, तो मरीज के खून के रिश्ते वाले अन्य सदस्यों की भी जांच करानी चाहिए। इससे उन लोगों की पहचान हो सकती है जिन्हें कम उम्र से ही नियमित स्क्रीनिंग और चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता है। इस प्रक्रिया के जरिए कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचाना जा सकता है और समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है, जो जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
परिवार में कैंसर का इतिहास होना केवल चिंता का विषय नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि अगली पीढ़ी को अपनी स्वास्थ्य जांच के प्रति अधिक जागरूक रहना चाहिए। सही समय पर की गई जीन टेस्टिंग और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भविष्य के जोखिमों को कम करने में मददगार होता है।
पटाखों के शोर से सुनने की शक्ति स्थायी रूप से नष्ट हो सकती है
भारत में पटाखों के लिए 125 डेसिबल की कानूनी सीमा है, लेकिन पास से शोर बढ़ सकता है
माइकल क्लिंगर ने कोचिंग करियर और भारत में महिला क्रिकेट के समर्थन पर चर्चा की
गुजरात जायंट्स के कोच माइकल क्लिंगर ने भारत में महिला क्रिकेट के बढ़ते क्रेज और अपने अनुभवों के बारे में बात की
अमिताभ बच्चन की पहचान के अनधिकृत उपयोग पर दिल्ली हाईकोर्ट का स्थायी प्रतिबंध
कोर्ट ने मोबाइल ऐप, ऑनलाइन डोमेन और क्विज़ बुक में अभिनेता के नाम और आवाज के उपयोग के खिलाफ आदेश दिया