चेरानल्लूर दुर्घटना: नाबालिग ड्राइवर के मामले में बीएनएस की धारा 105 के उपयोग पर कोर्ट की मांग
अदालत ने जांच अधिकारी को राज्य भर में नाबालिग ड्राइवरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का डेटा पेश करने का आदेश दिया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:08 · 3 मिनट का पाठ
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कोच्चि के चेरानल्लूर में हुई घातक दुर्घटना के मामले में एर्नाकुलम की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। इस मामले में शामिल 17 वर्षीय नाबालिग को मिली जमानत रद्द करने की मांग वाली अपील पर सुनवाई के दौरान, अदालत ने जांच अधिकारी को राज्य भर में नाबालिग ड्राइवरों द्वारा की गई दुर्घटनाओं में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत दर्ज एफआईआर का डेटा एक घंटे में पेश करने का निर्देश दिया है। बीएनएस की इस धारा के तहत गैर-इरादतन हत्या (जो हत्या की श्रेणी में न आए) के लिए सजा का प्रावधान है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधीश कविता गंगाधरन ने यह डेटा इसलिए मांगा है ताकि इसे जमानत के खिलाफ अपील के आदेश के साथ जोड़ा जा सके। यह अपील अभियोजन पक्ष और मृतक के परिवार द्वारा की गई है, जिन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा नाबालिग को दी गई जमानत पर आपत्ति है। न्यायाधीश ने क्राइम ब्रांच के सहायक आयुक्त को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राज्य में किसी अन्य समान मामले में इस धारा का उपयोग नहीं किया गया है और केवल इसी मामले में इसका उपयोग किया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी जांच अधिकारी की होगी।
अदालत ने जांच एजेंसी के कामकाज पर भी नाराजगी व्यक्त की। न्यायाधीश ने आलोचना करते हुए कहा कि जमानत के खिलाफ अपील प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट में दायर करने के बजाय नाबालिगों से जुड़े मामलों के लिए नियुक्त विशेष अदालत में दायर की जानी चाहिए थी। इसके साथ ही अदालत ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि क्या उन्हें कोई संदेह है कि कानून के साथ संघर्ष में रहने वाले बच्चों के लिए जुवेनाइल जस्टिस मॉडल रूल्स ही राज्य सरकार का एकमात्र ढांचा है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान इससे पहले 2 नवंबर, 2026 को अदालत ने अभियोजन पक्ष और पीड़ित परिवार के वकील के बीच हुई तकरार पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद अदालत ने उस दिन की कार्यवाही इन-कैमरा (बंद कमरे में) करने का आदेश दिया था। हालांकि, परिवार के वकील ने इस फैसले का विरोध किया था। मृतक जयबालकृष्णन की बेटी भद्रा कीर्ति ने मीडिया के सामने कहा कि परिवार को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पी.ए. बिंदु द्वारा प्रतिनिधित्व किए जा रहे अभियोजन पक्ष पर भरोसा नहीं है।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने अदालत में शिकायत की कि पीड़ित परिवार मीडिया में विरोधाभासी बयान देकर स्वतंत्र जांच में हस्तक्षेप कर रहा है। परिवार के वकील एम.जी. श्रीजीत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अभियोजन पक्ष पर ही सहयोग न करने का आरोप लगाया। वकील श्रीजीत ने अदालत को बताया कि उनके पास कुछ ऐसी बातें हैं जिन पर खुली अदालत में चर्चा नहीं की जा सकती, जिसके कारण न्यायाधीश ने कार्यवाही बंद कमरे में करने का निर्णय लिया। यह पूरा मामला चेरानल्लूर दुर्घटना के बाद कानूनी प्रक्रिया और जांच की पारदर्शिता को लेकर गंभीर चर्चाएं छेड़ रहा है।
इस संहिता के तहत विभिन्न अपराधों के लिए सजा और प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं, जिसमें नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले गंभीर अपराधों और दुर्घटनाओं के मामलों में कानूनी प्रावधानों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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