कानपुर और उन्नाव के बीच गंगा पर चार लेन वाले पुल के लिए ₹232 करोड़ मंजूर
अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यह राशि जारी की गई है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:06 · 3 मिनट का पाठ
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अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कानपुर और उन्नाव के बीच गंगा नदी पर प्रस्तावित चार लेन वाले पुल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए ₹232 करोड़ की वित्तीय मंजूरी जारी कर दी है। अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस धनराशि के जारी होने से इस पूरी परियोजना को अब गति मिलने की पूरी उम्मीद बंध गई है। इस नए पुल और उसके पहुंच मार्ग के निर्माण से कानपुर, उन्नाव और ट्रांसगंगा सिटी के बीच आना-जाना बहुत ही आसान और सुगम हो जाएगा।
इस पूरी परियोजना की कुल लागत ₹753.13 करोड़ तय की गई है। इस निर्धारित रकम में से ₹460 करोड़ प्रदेश सरकार द्वारा और बाकी बची हुई रकम उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) द्वारा अपने संसाधनों से खर्च की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस परियोजना के लिए सरकार की तरफ से ₹460 करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी थी, जिसके अंतर्गत इसकी पहली किस्त के रूप में ₹90 करोड़ जारी किए गए थे। अब बाकी रहने वाली धनराशि और दूसरी किस्त के हिस्से के रूप में इस ₹232 करोड़ की वित्तीय मंजूरी दी गई है।
इस प्रस्तावित पुल का संपर्क कानपुर के भैरवघाट-धोबीघाट क्षेत्र के साथ जुड़ेगा, जबकि दूसरी तरफ ट्रांसगंगा सिटी तक का पहुंच मार्ग विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की संरचना वाई-आकार की (Y-shape) रहेगी। इस योजना के तहत दो अलग-अलग दो लेन वाले पुलों को बनाने की योजना है, जिसके जरिए शहर में जुदा-जुदा स्थानों पर ट्रैफिक का जुड़ाव हो सकेगा। यह नया पुल बनने से कानपुर और उन्नाव के बीच सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इसके साथ ही लखनऊ से ट्रांसगंगा सिटी पहुंचना भी काफी आसान हो जाएगा।
इस निर्माण कार्य से गंगा बैराज पर लगातार रहने वाले वाहनों के भारी दबाव को घटाने में बड़ी मदद मिलेगी। उत्तम प्रकार का सड़क संपर्क मिलने से ट्रांसगंगा सिटी में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलने की पूरी संभावना है। इससे फैक्टरियों के लिए कच्चे माल की हेराफेरी, तैयार माल का परिवहन और कर्मचारियों की आवाजाही बहुत आसान हो जाएगी। परिणामस्वरूप, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना होने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इस पूरी परियोजना से करीब 10 लाख लोगों को बड़ा फायदा मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
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