अमिताभ बच्चन की पहचान के अनधिकृत उपयोग पर दिल्ली हाईकोर्ट का स्थायी प्रतिबंध
कोर्ट ने मोबाइल ऐप, ऑनलाइन डोमेन और क्विज़ बुक में अभिनेता के नाम और आवाज के उपयोग के खिलाफ आदेश दिया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 6:39 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कई व्यक्तियों और संस्थाओं पर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन के नाम, छवि, आवाज, स्वरूप और उनकी विशिष्ट पहचान का बिना अनुमति के व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग करने पर स्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति पुरुषोत्तम कुमार कौरावे ने यह अंतिम निर्णय सुनाया है।
यह कानूनी कार्यवाही 2022 में अमिताभ बच्चन द्वारा शुरू की गई थी। इस वाणिज्यिक वाद का मुख्य उद्देश्य मोबाइल एप्लिकेशन, ऑनलाइन डोमेन, पोस्टर बिक्री और क्विज़ बुक के माध्यम से उनकी पहचान के अनधिकृत शोषण को रोकना था। अदालत ने नवंबर 2022 में दिए गए अंतरिम निषेधाज्ञा को अब स्थायी डिक्री में बदल दिया है।
इस फैसले के माध्यम से उच्च न्यायालय ने कॉमन लॉ और बौद्धिक संपदा के सिद्धांतों के तहत अभिनेता के प्रचार और गोपनीयता के अधिकारों की रक्षा की है। अदालत ने दोहराया कि किसी सार्वजनिक हस्ती की पहचान का उपयोग उपभोक्ताओं को धोखा देने या गलत समर्थन का आभास कराने के लिए व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं किया जा सकता है।
इस मामले के समाधान के लिए अदालत ने समझौता समझौतों और सारांश निर्णय (समरी जजमेंट) दोनों का उपयोग किया। चार विशिष्ट प्रतिवादियों, जिनमें एक फर्जी वीडियो-कॉल ऐप बनाने वाला, एक अनधिकृत क्विज़ बुक प्रकाशक, मर्चेंडाइज पोस्टर बेचने वाला और एक डोमेन रजिस्ट्रार शामिल हैं, ने औपचारिक समझौता समझौते किए थे। इन पक्षों ने अपनी उल्लंघनकारी संपत्तियां जमा कर दी थीं और भविष्य में अभिनेता की पहचान का दुरुपयोग न करने का आश्वासन दिया था। इसके बदले में उन्हें वित्तीय नुकसान के हर्जाने से छूट दी गई थी।
दूसरी ओर, अन्य चार प्रतिवादियों, जो उपस्थित नहीं हुए थे और जिन्होंने लिखित जवाब देने में विफलता दिखाई थी, उनके खिलाफ बेंच ने सिविल प्रक्रिया संहिता के ऑर्डर VIII नियम 10 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग किया। अदालत ने पाया कि बच्चन की पहचान के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग के संबंध में तथ्यों पर कोई विवादित प्रश्न नहीं थे जिसके लिए पूर्ण ट्रायल की आवश्यकता हो, जिससे उनकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए सीधा आदेश दिया जा सका।
डिजिटल पायरेसी और व्यावसायिक दुरुपयोग के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय ने इस स्थायी डिक्री के दायरे को अज्ञात संस्थाओं और गुमनाम उल्लंघनकर्ताओं तक विस्तारित कर दिया है, जिन्हें पारंपरिक रूप से "जॉन डो" (या "अशोक कुमार") आदेशों के तहत वर्गीकृत किया जाता है। इससे अज्ञात डिजिटल पायरेट्स से लड़ने के लिए नए उपकरण उपलब्ध होंगे।
अंत में, अदालत ने अमिताभ बच्चन को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि कोई नई संस्था उनकी पहचान का उपयोग करने का प्रयास करती है, तो वे नई कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं या सीधे प्रवर्तन की मांग कर सकते हैं। इस फैसले को डिजिटल युग में सार्वजनिक हस्तियों की पहचान की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक हैं। उन्होंने अपने लंबे करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं और वे अपने अभिनय और आवाज के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं।
पटाखों के शोर से सुनने की शक्ति स्थायी रूप से नष्ट हो सकती है
भारत में पटाखों के लिए 125 डेसिबल की कानूनी सीमा है, लेकिन पास से शोर बढ़ सकता है
पारिवारिक इतिहास में कैंसर हो तो जीन टेस्टिंग के जरिए अगली पीढ़ी के जोखिम को जानें
माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों में कम उम्र में कैंसर होने से बच्चों में जोखिम बढ़ सकता है
माइकल क्लिंगर ने कोचिंग करियर और भारत में महिला क्रिकेट के समर्थन पर चर्चा की
गुजरात जायंट्स के कोच माइकल क्लिंगर ने भारत में महिला क्रिकेट के बढ़ते क्रेज और अपने अनुभवों के बारे में बात की