चीन की युतोंग बस के इलेक्ट्रिक बसों के निर्यात में भारी उछाल
कंपनी की कुल आय का आधे से अधिक हिस्सा अब विदेशी बिक्री से प्राप्त हो रहा है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:43 · अपडेट शाम 4:55 · 6 मिनट का पाठ
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दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक बस निर्माता कंपनी चीन की युतोंग बस (Yutong Bus) अपने विदेशी निर्यात में लगातार वृद्धि कर रही है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सऊदी अरब और मोरक्को जैसे देशों में इलेक्ट्रिक बसों की मांग तेजी से बढ़ रही है। कंपनी के एशिया-पैसिफिक सीईओ ने बताया कि विदेशों में सार्वजनिक परिवहन की मांग तेजी से बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब अधिक प्रीमियम इलेक्ट्रिक बसों की तलाश में हैं।
मध्य चीन के हेनान प्रांत के झेंगझोऊ में स्थित इस कंपनी के लिए विदेशी बाजार अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। वर्तमान में कंपनी की कुल आय का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशी बिक्री के माध्यम से प्राप्त होता है। कंपनी के निर्यात में न्यू-एनर्जी मॉडल, जिसमें प्योर-इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन शामिल हैं, की हिस्सेदारी इस वर्ष 25 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि 2018 में यह हिस्सेदारी केवल 3 प्रतिशत थी, जो दर्शाता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्यात में बड़ा उछाल आया है।
कंपनी के अनुसार, चीन सहित वैश्विक बाजार में बड़ी और मध्यम आकार की बसों के साथ-साथ कोच के क्षेत्र में युतोंग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक है। इस क्षेत्र में कंपनी को चीन की ही अन्य कंपनियों जैसे बीवाईडी (BYD), झोंगतोंग बस और शियामेन किंग लॉन्ग यूनाइटेड ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मर्सिडीज-बेंज और वोल्वो जैसी दिग्गज कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
दूसरी ओर, भारत भी वैश्विक व्यापार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में आयोजित 'यंग लीडर्स डिस्कोर्स फोरम' में कहा कि भारत एक पसंदीदा व्यापारिक भागीदार के रूप में उभर रहा है। कई देश भारत के साथ प्रेफरेंशियल और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करना चाहते हैं। गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि इस वित्तीय वर्ष में भारत का निर्यात 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
गोयल ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष भारत ने 863 अरब डॉलर का अब तक का सबसे अधिक निर्यात दर्ज किया था और चालू वर्ष के लिए 16 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष के पहले छह महीनों में निर्यात 14 प्रतिशत बढ़कर 480 अरब डॉलर हो गया है। वार्षिक लक्ष्य प्राप्त करने के लिए शेष छह महीनों में 520 अरब डॉलर का निर्यात करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर का महीना भी अच्छा रहा, हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी घोषित नहीं हुए हैं। गोयल ने बताया कि भारत 900 अरब डॉलर का लक्ष्य भी रख सकता था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है, लेकिन सरकार ने अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य चुना है। यह 900 अरब डॉलर का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा अनुमानित 1.9 प्रतिशत की वैश्विक व्यापार वृद्धि दर से दोगुना था। हालांकि, IMF ने हाल ही में इस अनुमान को संशोधित कर 3.5 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें भारत का निर्यात प्रदर्शन एक कारण हो सकता है।
भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि देश 'फ्रेजाइल फाइव' अर्थव्यवस्थाओं से बाहर निकलकर दुनिया की अग्रणी और सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। इस सफलता के पीछे भारत का टैलेंट पूल, युवा कार्यबल, लोकतांत्रिक प्रणाली, निर्णायक नेतृत्व और गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं की स्थानीय मांग जिम्मेदार है। भारत की औसत आयु 30 वर्ष से कम है और 140 करोड़ की जनसंख्या बड़ी मांग पैदा करती है। उन्होंने युवाओं से 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की महत्वाकांक्षा में योगदान देने का आह्वान किया।
इसके अलावा, गोयल ने वाणिज्य भवन में बायोफार्मा स्टार्टअप इकोसिस्टम और बायो-इकोनॉमी के विकास के लिए एक उच्च स्तरीय राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की। DPIIT, नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब द्वारा आयोजित इस बैठक में त्वरित नियामक मंजूरी, वित्तीय सुलभता, साझा बुनियादी ढांचे और उद्योग-अकादमिक जगत के बीच सहयोग पर जोर दिया गया। चर्चा में सिंगल विंडो क्लीयरेंस, पेटेंट आवेदन प्रक्रिया के सरलीकरण और बजट 2026-27 में घोषित 'बायोफार्मा शक्ति' (Biopharma SHAKTI) पर ध्यान केंद्रित किया गया। साझा प्रयोगशालाओं और क्लिनिकल ट्रायल सुविधाओं को विकसित कर लागत कम करने और स्टार्टअप्स की मदद करने की बात कही गई।
वैश्विक राजनीति में, विशेष रूप से अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के परिणाम भारत पर प्रभाव डाल सकते हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स द्वारा सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों पर नियंत्रण पाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत तेज हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि समझौता पूरा होने तक भारत पर उच्च टैरिफ लगाया जा सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस, चीन और ईरान के खिलाफ विदेश नीति में विफलता के बाद भारत पर दबाव बढ़ाकर त्वरित जीत हासिल करना चाहेंगे, ताकि अमेरिकी कृषि और औद्योगिक माल के लिए बाजार मिल सके।
कॉन एडवाइजरी ग्रुप के दीप पाल के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के लिए अब कोई भी निर्णय घरेलू रिपब्लिकन मतदाताओं के लिए 'जीत' जैसा दिखना चाहिए। दूसरी ओर, भारतीय वार्ताकार इस स्थिति को अपने पक्ष में कर अधिक अनुकूल समझौता प्राप्त करने के अवसर के रूप में देख सकते हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस अब तक पीछे हटने के बजाय अपनी नीतियों पर अडिग रहा है। उल्लेखनीय है कि 'लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' के तहत रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसे द्विपक्षीय समर्थन मिला है।
युतोंग बस चीन की एक अग्रणी वाहन निर्माता कंपनी है जो मुख्य रूप से बसों के उत्पादन और निर्यात से जुड़ी है और वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक बस निर्माताओं में से एक है।
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