जॉब मार्केट की बदलती जरूरतों के मुताबिक शॉर्ट-टर्म कोर्स और कौशल विकास पर जोर
आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों की वकालत की है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 1:38 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
आज के तेजी से बदलते जॉब मार्केट और टेक्नोलॉजी के युग में शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव करने की सख्त जरूरत है। बीआईटी मेसरा के वर्तमान कुलपति और आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक (२०१२-२०१७) प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि देश के वर्कफोर्स को तैयार करने के लिए पद्धतियों की नए सिरे से समीक्षा करना अनिवार्य है। 'आज तक' की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने स्पष्ट किया है कि भले ही शॉर्ट-टर्म कोर्स और समय-समय पर की जाने वाली री-स्किलिंग कर्मचारियों को खास प्रकार की नौकरियों के लिए जरूरी कौशल हासिल करने में मददगार होते हैं, लेकिन शिक्षा की नींव हमेशा बुनियादी सिद्धांतों पर ही टिकी होनी चाहिए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक टेक्नोलॉजी अब हर क्षेत्र के व्यवसायों को प्रभावित कर रही है। इस संदर्भ में प्रो. मन्ना का मानना है कि मुख्य प्रश्न यह नहीं है कि डिग्री प्रोग्राम्स का युग पूरा हो गया है, बल्कि प्रश्न यह है कि क्या हम अपने युवाओं और प्रोफेशनल्स को इतना सक्षम बना रहे हैं कि जब उनका वर्तमान कौशल अपर्याप्त साबित हो, तो वे खुद को बदलती परिस्थिति के मुताबिक ढाल सकें। यदि व्यक्तियों को बुनियादी बातों की मजबूत समझ दी जाए, तो उन्हें कम अवधि का प्रशिक्षण देकर ऐसे कौशल सिखाए जा सकते हैं जो उस समय तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए प्रासंगिक हों।
प्रोफेसर मन्ना ने शिक्षा और प्रशिक्षण के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि, कोई खास मशीन चलाना या उसका रखरखाव करना हो, तो उसके लिए डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स पर्याप्त हैं। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग और हार्डवेयर सेक्टर का उदाहरण देते हुए बताया कि, आमतौर पर ऐसे उद्योगों में एक इंजीनियर के साथ ५ से ६ डिप्लोमा धारक और १० से १२ सर्टिफिकेट स्तर के कामगारों की जरूरत होती है। हालांकि, जो व्यक्ति सिस्टम को गहराई से समझना चाहता है, उसे विकसित करना चाहता है या उसके डिजाइन में आने वाले बदलावों के मुताबिक खुद को तैयार करना चाहता है, उसे मजबूत वैचारिक आधार की जरूरत होती है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि कम अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को कभी भी डिग्री का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
री-स्किलिंग की अनिवार्यता पर बात करते हुए प्रो. मन्ना ने कहा कि, यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि कोई एक कौशल व्यक्ति के पूरे कार्यकाल के दौरान प्रासंगिक रहेगा। उद्योग बदलते रहते हैं, इसलिए कर्मचारियों के पास फिर से शिक्षा प्राप्त करने और अपने ज्ञान को अपडेट करने का अवसर होना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि, आज जिन्हें आप प्रशिक्षण दे रहे हैं, उनका कौशल हमेशा उपयोगी रहेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए, समय-समय पर खुद को अपडेट करते रहना जरूरी है। यह सीखने की प्रक्रिया सिर्फ तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं होनी चाहिए, क्योंकि एक विषय दूसरे विषय से तेजी से सीख रहा है।
खुद आईआईटीयन रहे प्रोफेसर मन्ना ने भौतिकी (फिजिक्स) और जीवविज्ञान (बायोलॉजी) के बीच बढ़ते संबंधों का उदाहरण देते हुए समझाया कि क्यों प्रोफेशनल्स को पारंपरिक अनुशासन की सीमाओं से बाहर निकलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि, अब फिजिक्स बायोलॉजी को अधिक बेहतर ढंग से समझता है, इसलिए भौतिकीविदों और जीवविज्ञानियों को एक-दूसरे के साथ जुड़ना होगा या लगातार संपर्क में रहना होगा। मेडिकल प्रैक्टिस को भी उन्होंने इस प्रकार के समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण बताया है।
प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना एक जाने-माने भारतीय शिक्षाविद् और वैज्ञानिक हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। अपने करियर में वे आईआईटी कानपुर के निदेशक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने २०१२ से २०१७ तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे अपनी शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र की विशेषज्ञता के लिए जाने जाते हैं और देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए लगातार मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
ન્યુઝીલેન્ડ સામે ટેસ્ટ શ્રેણી પૂર્વે બુમરાહ અને જાડેજા ઈન્ડિયા એ ટીમમાં સામેલ થશે
લિંકન ખાતે શનિવારથી શરૂ થતી ન્યુઝીલેન્ડ એ સામેની અંતિમ ચાર-દિવસીય મેચમાં દિગ્ગજ ખેલાડીઓ રમશે
NHAI ने चार लेन और उससे अधिक चौड़े राजमार्गों के लिए बैरियर-लेस टोलिंग गाइडलाइन्स जारी कीं
नई तकनीक के माध्यम से वाहनों को टोल बूथ पर रोके बिना ही टोल संग्रह किया जाएगा
BCI ने लॉ कोर्स के लिए आयु सीमा हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया
3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में अब उम्र का कोई बंधन नहीं रहेगा