कक्षा 12 की परीक्षा में कैलकुलेटर के उपयोग को लेकर हाईकोर्ट ने CBSE से जवाब मांगा
अकाउंटेंसी और गणित की परीक्षा में कैलकुलेटर की अनुमति देने की याचिका पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 11:40 · 3 मिनट का पाठ
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों को कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति देने संबंधी एक याचिका पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इन सभी अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करने के लिए नोटिस जारी किया है।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की संयुक्त पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिका में मुख्य रूप से कक्षा 12 की अकाउंटेंसी परीक्षा में बेसिक और नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति मांगी गई है। इसके अलावा, गणित की परीक्षाओं में कैलकुलेटर का उपयोग किया जाना चाहिए या नहीं, इस संबंध में विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा जांच करने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि अकाउंटेंसी और गणित के पेपर में छात्रों को लंबे गणितीय सवालों को हाथ से हल करने में काफी समय बिताना पड़ता है। इस कारण छात्रों के पास विषयों की अपनी समझ प्रदर्शित करने और सीखे गए सिद्धांतों का उपयोग करने के लिए कम समय बचता है। याचिका में कहा गया है कि लंबी गणनाएं करने से समय की बर्बादी होती है और छात्रों की क्षमता पर असर पड़ता है।
याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि CBSE करिकुलम कमेटी ने अपनी 70वीं बैठक के दौरान इस संबंध में एक प्रस्ताव मंजूर किया था। यह बैठक 25 और 26 नवंबर, 2024 को आयोजित की गई थी, जिसमें कमेटी ने कक्षा 12 की अकाउंटेंसी परीक्षा में बेसिक और नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के उपयोग को मंजूरी दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी तक कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति नहीं दी है, वह केवल अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, कैलकुलेटर की अनुमति देना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के अनुरूप है। ये नीति दस्तावेज रटने और याद रखने के बजाय वैचारिक समझ और उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर जोर देते हैं। कैलकुलेटर के उपयोग से छात्र गणना में समय बचाकर सिद्धांतों की गहराई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि इस प्रस्ताव के संबंध में CBSE और अन्य संबंधित अधिकारियों को विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी और प्रतिक्रिया देने का अनुरोध किया गया था। लेकिन, निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब नहीं मिलने के कारण अंततः दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। कोर्ट ने अब सभी पक्षों को छह सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है ताकि इस मामले में आगे की कार्रवाई हो सके।
यदि कक्षा 12 में कैलकुलेटर की यह अनुमति मिलती है, तो यह प्रश्न भी सामने आ रहा है कि क्या इसे कक्षा 10 के छात्रों के लिए भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल कोर्ट की कार्यवाही जारी है और अधिकारियों के जवाब के बाद ही आगामी निर्णय लिया जाएगा।
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