अरावली में खनन मामले पर हाईकोर्ट सख्त, सुरक्षा को बताया बड़ा जनहित का मुद्दा
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अरावली पहाड़ियों के संरक्षण पर जोर देते हुए चरखी दादरी में चल रही खनन गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 1:37 · 3 मिनट का पाठ
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अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अरावली पहाड़ियों के संरक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण जनहित का विषय बताया है और चरखी दादरी में हो रही खनन गतिविधियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी जगह खनन की मंजूरी देने से पहले संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन पहाड़ियों के संरक्षण से जुड़े जनहित की किसी भी प्रकार से अनदेखी न हो।
अदालत ने यह स्पष्ट भी किया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार का आदेश देने से पहले वह इस बात को लेकर पूर्णतः संतुष्ट होना चाहती है कि विवादित क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के हितों का पर्याप्त बचाव हो रहा है या नहीं। हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि अरावली का संरक्षण हम सभी के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। न्यायालय ने आगे कहा कि मूल याचिकाकर्ता भले ही अब इस मामले को आगे बढ़ाने में अधिक रुचि न दिखा रहे हों, लेकिन इससे जुड़े व्यापक जनहित के महत्वपूर्ण प्रश्नों की गंभीरतापूर्वक जांच की जाएगी। इस मामले में न्यायिक सहायता प्रदान करने के लिए अदालत ने अधिवक्ता जतिन बंसल को न्याय मित्र के रूप में नियुक्त किया है और उन्हें आवश्यक निर्देश भी दिए हैं।
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध ड्रोन सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह खनन क्षेत्र अरावली पहाड़ियों का ही एक हिस्सा प्रतीत होता है। पट्टे पर दिए गए खनन क्षेत्र को छोड़कर इसके आसपास के सभी क्षेत्रों में हरियाली युक्त वन क्षेत्र मौजूद है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं द्वारा यह दलील दी गई थी कि राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित भूमि को अनुपयोगी पहाड़ यानी 'गैर मुमकिन पहाड़' के रूप में दर्शाया गया है। अदालत ने इस पर कहा कि राजस्व रिकॉर्ड की ये प्रविष्टियां भी उसके इस प्रारंभिक विचार का पर्याप्त समर्थन करती हैं कि खनन क्षेत्र अरावली पहाड़ियों का ही हिस्सा है और इसका संरक्षण होना ही चाहिए।
इस मामले में खनन पट्टे की वैधता को लेकर दोनों पक्षों द्वारा अलग-अलग दावे पेश किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि इस खनन पट्टे की अवधि जनवरी 2026 में ही पूरी हो चुकी है। दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने अपने जवाब में अदालत को बताया कि यह पट्टा 2 जनवरी 2027 तक कानूनी रूप से वैध है।
इन सभी विवादों और गंभीर मामलों को ध्यान में रखते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चरखी दादरी के उपायुक्त को एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। डीसी को हलफनामे के माध्यम से यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित खनन क्षेत्र वास्तव में अरावली पहाड़ियों का हिस्सा है या नहीं और क्या वहां कानूनी रूप से खनन करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।
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