दिल्ली-NCR सहित शहरों में 4.5 अरब डॉलर के निवेश से प्रॉपर्टी की मांग बढ़ेगी
जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान निजी इक्विटी निवेश में 16 प्रतिशत का उछाल देखा गया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 4:11 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारत का रियल एस्टेट मार्केट वर्ष 2026 के अंत की ओर बहुत ही सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में आवासीय संपत्तियों की मजबूत मांग, कमर्शियल ऑफिस स्पेस की लीजिंग में हुई वृद्धि और संस्थागत निवेशों में आई तेजी के कारण पूरा सेक्टर मजबूती पकड़ रहा है। विशेष रूप से त्योहारी सीजन के दौरान नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और घरों की बिक्री प्रक्रिया में और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
आज तक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सैविल्स इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी से सितंबर 2026 की अवधि के दौरान भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में निजी इक्विटी निवेश 4.5 अरब डॉलर रहा है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। निवेशक अब केवल आवासीय और ऑफिस प्रॉपर्टी तक सीमित नहीं रह रहे हैं, बल्कि औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी तथा डेटा सेंटर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी रुचि दिखा रहे हैं। विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स और सप्लाई चेन से संबंधित गतिविधियों के बढ़ने के कारण वेयरहाउस और औद्योगिक संपत्तियों की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ऑफिस स्पेस की लीजिंग की बात करें तो, सैविल्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 2026 के पहले नौ महीनों में देश के 6 मुख्य शहरों में कुल ऑफिस लीजिंग 60.7 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 6 प्रतिशत अधिक है। इस मांग का मुख्य कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), टेक्नोलॉजी कंपनियों और वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनियों की बढ़ती गतिविधियां हैं। 2026 में अब तक की कुल ऑफिस लीजिंग में GCC की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत रही है, जो दर्शाता है कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण बिजनेस और टेक्निकल हब के रूप में उभर रहा है। दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और हैदराबाद में मजबूत बिजनेस स्ट्रक्चर और सुधरती कनेक्टिविटी के कारण ऑफिस स्पेस की मांग निरंतर बनी हुई है।
सैविल्स इंडिया के रिसर्च एंड कंसल्टिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर अरविंद नंदन बताते हैं कि आवासीय मांग में मजबूती, ऑफिस स्पेस की निरंतर मांग और संस्थागत निवेश में हुई वृद्धि भारतीय रियल एस्टेट मार्केट को 2026 के अंत में मजबूत स्थिति में ले जा रही है।
आवासीय क्षेत्र में दिल्ली-NCR, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग अधिक देखी जा रही है। त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए डेवलपर्स ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष ऑफर, आसान पेमेंट प्लान और नए प्रोजेक्ट्स पेश कर रहे हैं। रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासना के अनुसार, त्योहारी सीजन घर खरीदारों के विश्वास और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने आगे कहा कि सोनीपत, बहादुरगढ़ और रोहतक जैसे उभरते टियर-2 बाजारों में काफी संभावनाएं हैं और लोग अब प्लॉटेड डेवलपमेंट यानी जमीन के टुकड़ों पर आधारित प्रोजेक्ट्स में अधिक रुचि ले रहे हैं, क्योंकि खरीदार जमीन के मालिकाना हक, अपनी जरूरत के अनुसार निर्माण और भविष्य में अधिक कीमत मिलने की संभावनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
हबटाउन लिमिटेड के हेड ऑफ मार्केटिंग कम्युनिकेशन एंड ब्रांड रूपम डे के अनुसार, घर खरीदारों की मांग, कमर्शियल लीजिंग और संस्थागत निवेश के कारण रियल एस्टेट मार्केट का आउटलुक सकारात्मक रहा है।
हालांकि, इस तमाम वृद्धि के बावजूद रियल एस्टेट क्षेत्र के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। घरों की बढ़ती कीमतें, आम लोगों की क्रय शक्ति में सीमा और निर्माण लागत में हुई वृद्धि इस सेक्टर के लिए मुख्य चिंता के विषय बने हुए हैं।
ન્યુઝીલેન્ડ સામે ટેસ્ટ શ્રેણી પૂર્વે બુમરાહ અને જાડેજા ઈન્ડિયા એ ટીમમાં સામેલ થશે
લિંકન ખાતે શનિવારથી શરૂ થતી ન્યુઝીલેન્ડ એ સામેની અંતિમ ચાર-દિવસીય મેચમાં દિગ્ગજ ખેલાડીઓ રમશે
NHAI ने चार लेन और उससे अधिक चौड़े राजमार्गों के लिए बैरियर-लेस टोलिंग गाइडलाइन्स जारी कीं
नई तकनीक के माध्यम से वाहनों को टोल बूथ पर रोके बिना ही टोल संग्रह किया जाएगा
BCI ने लॉ कोर्स के लिए आयु सीमा हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया
3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में अब उम्र का कोई बंधन नहीं रहेगा