गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा: एग्रीगेटर्स पर 2% लेवी पर विचार
सरकार 1.2 करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स को बीमा, स्वास्थ्य और प्रसूति सहायता देने के लिए नई योजना लाएगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 5:23 · 4 मिनट का पाठ
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भारत सरकार देश के गिग वर्कर्स के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना लागू करने की तैयारी कर रही है। 'द इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार गिग वर्कर्स को बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रसूति सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए एग्रीगेटर्स पर 2% ट्रांजैक्शन-आधारित लेवी (टैक्स) लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा का कवच प्रदान करना है।
इस योजना के तहत 1.2 करोड़ से अधिक गिग वर्कर्स को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की लेवी से विभिन्न प्रकार के एग्रीगेटर्स के बीच समानता बनी रहेगी और सामाजिक सुरक्षा के लिए आवश्यक फंड एकत्र किया जा सकेगा। यह नई योजना वर्ष 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, इन लाभों को प्राप्त करने के लिए गिग वर्कर्स को सरकार द्वारा निर्धारित किए जाने वाले निश्चित काम के मानदंडों को पूरा करना होगा। इन मानदंडों के बारे में विस्तृत जानकारी आगामी समय में स्पष्ट की जाएगी।
गिग वर्कर्स यानी वे श्रमिक जो पारंपरिक नौकरी के ढांचे से अलग रहकर डिजिटल प्लेटफॉर्म या एग्रीगेटर्स के माध्यम से काम करते हैं। वर्तमान में इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए कोई निश्चित सामाजिक सुरक्षा कवच उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण वे दुर्घटना, बीमारी या अन्य आपातकालीन स्थिति के समय आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। इस नई लेवी के माध्यम से एकत्र की गई राशि का उपयोग सीधे इन श्रमिकों के कल्याण के लिए किया जाएगा। सरकार के इस कदम को गिग इकोनॉमी के क्षेत्र में एक बड़ा सुधारवादी कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह लंबे समय से लंबित मांगों को संबोधित करता है।
इस योजना के कार्यान्वयन के लिए सरकार विभिन्न हितधारकों के साथ चर्चा कर रही है। एग्रीगेटर्स पर 2% लेवी लगाने का निर्णय लेते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि इससे उद्योग पर अनावश्यक बोझ न पड़े और साथ ही श्रमिकों को भी पर्याप्त लाभ मिले। इस दृष्टिकोण के बारे में व्यापक सहमति देखी जा रही है कि यह पद्धति सबसे अधिक न्यायपूर्ण और व्यावहारिक है। 2027 में जब यह योजना लागू होगी, तब गिग वर्कर्स के लिए यह राहत का एक बड़ा विषय बन जाएगी।
गिग वर्कर्स में सामान्यतः डिलीवरी पार्टनर्स, राइड-हेलिंग ड्राइवर्स और अन्य ऑन-डिमांड सेवाएं प्रदान करने वाले श्रमिक शामिल होते हैं। ये श्रमिक टेक्नोलॉजी आधारित प्लेटफॉर्म्स से जुड़े होते हैं और उनकी आय काम के घंटों या ट्रांजैक्शन पर आधारित होती है। इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके कारण उनकी सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था। सरकार के इस प्रस्ताव से इन श्रमिकों को एक नई पहचान और सुरक्षा मिलेगी।
इस योजना के कार्यान्वयन के बाद, एग्रीगेटर्स की जिम्मेदारी बढ़ेगी और उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 2% लेवी सरकार में जमा करनी होगी। इस राशि का उपयोग गिग वर्कर्स के लिए वेलफेयर फंड में किया जाएगा। इस फंड से ही उन्हें स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और महिला श्रमिकों के लिए प्रसूति सहायता जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। सरकार की इस योजना से गिग वर्कर्स के जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।
गिग इकोनॉमी एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसमें कंपनियां दीर्घकालिक कर्मचारियों को रखने के बजाय स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर्स या फ्रीलांसर्स के साथ अल्पकालिक अनुबंध करके काम करवाती हैं। यह मॉडल कंपनियों को लागत घटाने में मदद करता है, लेकिन श्रमिकों के लिए यह अक्सर अनिश्चितता लाता है। भारत में पिछले एक दशक में डिजिटल क्रांति के कारण गिग इकोनॉमी का तेजी से विकास हुआ है, जिसमें फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स और कैब सेवाएं प्रमुख हैं। इस क्षेत्र में काम करने वाले लाखों लोगों के लिए कोई कानूनी सुरक्षा न होने के कारण, सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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