बोरीवली में अतिक्रमण हटाने में विफलता के कारण सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर का वेतन रोका
अश्विनी भिड़े और अन्य अधिकारियों के नवंबर 2026 के वेतन को रोकने का सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:29 · अपडेट सुबह 2:38 · 5 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े के वेतन को रोकने का आदेश दिया है। बोरीवली पूर्व में बीईएसटी (BEST) बस स्टैंड के लिए आरक्षित भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने में विफलता के कारण अदालत ने यह सख्त कदम उठाया है। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि कमिश्नर अश्विनी भिड़े और अन्य अधिकारियों का वेतन 1 दिसंबर तक रोका जाए। अन्य अधिकारी कौन हैं, इस संबंध में तत्काल स्पष्टता नहीं हुई है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी भिड़े के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। अदालत ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। पिछले निर्देशों के पालन में बीएमसी द्वारा की गई देरी के कारण अदालत ने नगर निगम पर ₹5 लाख का जुर्माना भी लगाया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कमिश्नर ने पिछले आदेशों का पालन करने के लिए और समय मांगा था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
बोरीवली में स्थित यह भूमि, जो बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) बस स्टैंड के लिए आरक्षित है, पिछले कुछ वर्षों से नगर निगम और एक निजी डेवलपर के बीच विवाद का केंद्र रही है। अगस्त 2025 में पारित एक आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपर को 3,400 वर्ग मीटर का प्लॉट नगर निगम को सौंपने का निर्देश दिया था। अदालत ने निगम को तीन महीने के भीतर बस स्टैंड चालू करने के लिए भी कहा था और संपत्ति से अतिक्रमण हटाने के कदम जारी रखने का निर्देश दिया था।
नवंबर 2025 में, अदालत ने चिंता व्यक्त की थी कि नगर निगम अधिकारियों ने अतिक्रमण नहीं हटाया है। अदालत ने कमिश्नर से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था, जिसमें यह विस्तृत सूची देनी थी कि संपत्ति पर किसका कब्जा है, उन्हें खाली करने के क्या नोटिस दिए गए हैं और क्या पट्टे या स्वामित्व के कोई दावे हैं।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान, जब बीएमसी के वकील ने निर्देशों का पालन करने के लिए एक महीने का समय मांगा, तो बेंच ने इस अनुरोध को सख्ती से खारिज कर दिया। अदालत ने नगर निगम के इस स्पष्टीकरण पर कड़ी आपत्ति जताई कि अधिकारियों को कार्रवाई करने से पहले मराठी में मौजूद दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद कराना आवश्यक है। जस्टिस जोयमाल्य बागची ने हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी का उल्लेख करते हुए पूछा, "जिस अधिकारी ने हलफनामा दाखिल किया है वह डॉ. तांबे हैं। क्या आप चाहते हैं कि हम यह मानें कि उन्हें मराठी नहीं आती?"
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संदेह व्यक्त किया कि अधिकारी अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत कर सकते हैं। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का घोर उल्लंघन है, जो अतिक्रमणकारियों की सीधी मिलीभगत और समर्थन से किया गया है।"
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, बीएमसी के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी कार्यरत कमिश्नर का वेतन सीधे रोकने का आदेश दिया गया हो। हालांकि सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट ने अतीत में मुंबई के नगर प्रमुखों को कड़ी चेतावनी, कारण बताओ नोटिस और जेल की धमकी दी है, लेकिन कमिश्नर के व्यक्तिगत वेतन को रोकने का आदेश पहले कभी नहीं देखा गया। अदालत ने सख्त शब्दों में कहा कि यदि काम करना है तो "आधी रात को बैठकर आदेश पारित करें" ताकि काम पूरा हो सके।
अदालत के इस सख्त आदेश के एक दिन बाद, यानी बुधवार को, नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया। टाइम्स ऑफ इंडिया के एक पत्रकार की रिपोर्ट के अनुसार, बोरीवली पूर्व में स्वामी विवेकानंद रोड पर स्थित 3,400 वर्ग मीटर के प्लॉट से 27 व्यावसायिक इकाइयों को ध्वस्त कर दिया गया। इस अभियान में आर सेंट्रल वार्ड द्वारा लगभग 70 कर्मचारी, 2 जेसीबी मशीनें और 4 डंपर तैनात किए गए थे।
अश्विनी भिड़े को 31 मार्च, 2026 को बृहन्मुंबई नगर निगम की पहली महिला नगर आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। वह इस वर्ष मार्च महीने में कमिश्नर नियुक्त हुई थीं।
कानूनी रूप से, अदालतें आमतौर पर 'नागरिक संस्था' (जिसका भुगतान नगर निगम के खजाने से किया जाता है) पर जुर्माना लगाती हैं या चेतावनी देती हैं, लेकिन इस मामले में कमिश्नर और उनके व्यक्तिगत स्टाफ के नवंबर 2026 के वेतन पर सीधा फ्रीज लगाने का आदेश एक अभूतपूर्व घटना बन गया है।
वह बृहन्मुंबई नगर निगम की पहली महिला कमिश्नर रही थीं।
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