भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 में वैश्विक निवेशक और उद्योग जगत के दिग्गज जुटे
ओडिशा ने ₹1.17 लाख करोड़ के 18 एमओयू किए; गोवा में ₹3,000 करोड़ के निवेश के लिए हुए समझौते
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 1:14 · अपडेट सुबह 1:23 · 6 मिनट का पाठ
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नई दिल्ली में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी (BRE) समिट और एक्सपो 2026 के दूसरे दिन वैश्विक निवेशक और उद्योग जगत के नेता एकत्रित हुए। इस शिखर सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, 40 से अधिक मंत्री, वरिष्ठ नीति निर्माता, निवेशक, वित्तीय संस्थान और उद्योग के अग्रणी शामिल हुए हैं। इस कार्यक्रम में देश के 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, प्रोजेक्ट पाइपलाइन, विनिर्माण क्षमताओं और नीतिगत पहलों का प्रदर्शन किया।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी, केंद्रीय बिजली और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा बिजली राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने 'द नेक्स्ट टेरावाट' मंत्रिस्तरीय प्लेनरी में भाग लिया। इस उच्च स्तरीय संवाद का आयोजन इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA), CEEW और एनर्जीवा वेंचर्स द्वारा किया गया था। इस प्लेनरी का उद्देश्य आने वाले दशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन ढांचे का रोडमैप तैयार करना था।
इन चर्चाओं में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए चार मुख्य प्राथमिकता क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया: एकीकृत ऊर्जा नियोजन, आपूर्ति और भंडारण; ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विस्तार और लचीलापन; प्रोजेक्ट्स और इकोसिस्टम के लिए टेरावाट-स्केल फाइनेंसिंग; और सुरक्षित एवं सस्ती ऊर्जा के लिए डिजिटलीकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)।
इस शिखर सम्मेलन के दौरान ओडिशा राज्य के लिए बड़ी खबरें सामने आईं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देओ की उपस्थिति में ओडिशा ने लगभग ₹1.17 लाख करोड़ के निवेश के साथ 18 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, बोंडाडा ग्रुप के हिस्से बोंडाडा इंजीनियरिंग लिमिटेड ने गोवा इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन बोर्ड (Goa-IPB) के साथ एमओयू किया है, जो गोवा में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लगभग ₹3,000 करोड़ के निवेश के लिए प्रतिबद्ध है।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय सौर सहयोग को आगे बढ़ाने और इसके लाभों का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड' के सिद्धांत के माध्यम से इस विजन को आगे बढ़ाने की बात कही। जोशी ने उल्लेख किया कि भारत लगातार तीसरी बार इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है।
जोशी ने बताया कि वर्ष 2015 में भारत और फ्रांस ने मिलकर ISA की स्थापना की थी, जो आज 130 सदस्य देशों के साथ ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक मजबूत मंच बन गया है। BRE समिट और एक्सपो 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नवंबर, 2026 को किया था और यह कार्यक्रम 5 नवंबर, 2026 को समाप्त होगा। मंत्री ने कहा कि चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा की प्रतिबद्धताओं को निवेश में, साझेदारी को प्रोजेक्ट्स में और महत्वाकांक्षाओं को ठोस प्रभाव में बदलना है।
वित्तीय सहयोग के बारे में बात करते हुए जोशी ने कहा कि 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अफ्रीका सोलर सुविधा अफ्रीका के विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत इस क्षेत्र में लगभग ₹225 करोड़ की प्रतिबद्धता रखता है। इसके अलावा, 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नाइजीरिया विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा फंड पूरे महाद्वीप में इस मॉडल के विस्तार के लिए एक आदर्श उदाहरण पेश करता है।
सौर ऊर्जा के सामाजिक प्रभाव के बारे में जानकारी देते हुए जोशी ने बताया कि फिजी, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स में ISA के सहयोग से चलने वाली पहल दर्शाती हैं कि सौर ऊर्जा के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं, स्कूलों में बिजली, स्वच्छ पेयजल और कृषि उत्पादों के कोल्ड स्टोरेज द्वारा आजीविका को मजबूत किया जा सकता है। मॉरीशस से शुरू होकर, इस एकीकृत मॉडल का उपयोग लघु द्वीप विकासशील देशों के लिए किया जा रहा है।
भारत में किसानों के सशक्तिकरण के संबंध में मंत्री ने बताया कि सौर ऊर्जा के माध्यम से 30 लाख किसानों को सशक्त बनाया गया है। भारत की PM-कुसुम पहल के माध्यम से सिंचाई लागत को कम किया जा सकता है और आय के अतिरिक्त अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इस मॉडल को अफ्रीकी देशों में भी अपनाने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाने के लिए जोशी ने 17 सौर प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग संसाधन केंद्रों, ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर-शाइन (SHINE) और AI-सक्षम ISA एकेडमी की स्थापना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आ रहे हैं, इसलिए सस्ती और विश्वसनीय स्वच्छ बिजली की पहुंच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
शिखर सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम 'कंट्री पार्टनर्स' के रूप में भाग ले रहे हैं, जो प्रौद्योगिकी और निवेश साझेदारी में सहायक होंगे। इसके अलावा, 'Watts Next: Innovators’ Ideas for India’s Energy Security, Agenda 2047' नामक फोरम में सुमंत सिन्हा, श्रेया मिश्रा, गिरीश आर तांती, प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला और मेरेडिथ एनेक्स जैसे विशेषज्ञों ने प्रौद्योगिकी और नीति पर विचार प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर MNRE के सचिव संतोष कुमार सारंगी, ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना, फ्रांस के पारिस्थितिक संक्रमण मंत्री मैथ्यू लेफेवर, डेनमार्क के मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड, सूरीनाम के मंत्री डेविड अबियामोफो, सेशेल्स की मंत्री गेराल्डा डेसोबिन और श्रीलंका के ऊर्जा राज्य मंत्री मुहम्मद अरकम इलियास उपस्थित थे।
इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था थी। इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और सदस्य देशों में सौर ऊर्जा के कार्यान्वयन के लिए सहयोग बढ़ाना था। यह वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।
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