कृषि भूमि को गैर-कृषि में बदलने के नियमों में ढील पर पर्यावरण समूह की चिंता
पूवुलगिन नानबर्गल ने भूमि रूपांतरण की जांच प्रक्रिया के कमजोर होने की चेतावनी दी है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 11:27 · 3 मिनट का पाठ
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तमिलनाडु में कृषि भूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए परिवर्तित करने के नियमों में किए गए हालिया संशोधनों पर पर्यावरण संरक्षण संगठन 'पूवुलगिन नानबर्गल' ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संगठन का मानना है कि नए बदलावों के कारण भूमि रूपांतरण की अनुमति देते समय की जाने वाली गहन जांच प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।
राज्य सरकार के आवास और शहरी विकास विभाग ने बुधवार को एक जी.ओ. (सरकारी आदेश) के माध्यम से 'तमिलनाडु चेंज ऑफ लैंड यूज (गैर-नियोजन क्षेत्रों में कृषि से गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए) नियम, 2017' में संशोधन किया है। पूवुलगिन नानबर्गल ने एक बयान में कहा कि सरकार कृषि भूमि को परिवर्तित करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। संगठन ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि पहले अनुमति देने से पहले जिला कलेक्टर के लिए व्यक्तिगत रूप से भूमि का दौरा करना और विभिन्न कारकों की जांच करना अनिवार्य था, लेकिन अब इस आवश्यकता को हटा दिया गया है।
संशोधित नियमों के अनुसार, अब वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए विकसित करने के आवेदन सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से जमा करने होंगे। इस आवेदन के साथ कई दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य है, जिनमें बिक्री या लीज डीड की प्रतियां, पट्टा, साइट ड्रेनेज प्लान, साइट प्लान और प्रस्तावित लेआउट, सबडिवीजन या बिल्डिंग प्लान शामिल हैं।
इसके अलावा, आवेदकों को 500 मीटर के दायरे में मौजूदा विकास को दर्शाने वाला टोपोग्राफिक प्लान अपलोड करना होगा। साथ ही एक ऑनलाइन हलफनामा (एफिडेविट) देना होगा कि प्रस्ताव में किसी भी सरकारी, पोरोम्बोके या तीसरे पक्ष की भूमि को शामिल नहीं किया गया है। आवेदक को चालू वर्ष सहित पिछले 3 फसली वर्षों के चित्ता और अडंगल रिकॉर्ड की प्रतियां भी प्रस्तुत करनी होंगी।
संशोधित नियम 4 के अनुसार, वेटलैंड्स के मामले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निदेशक के लिए राजस्व मंडल अधिकारी, कृषि के संयुक्त निदेशक और जल संसाधन विभाग के कार्यकारी अभियंता से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना आवश्यक है। हालांकि, पूवुलगिन नानबर्गल ने कहा है कि यह संशोधित प्रक्रिया आवेदकों द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों और स्व-प्रमाणित घोषणाओं पर अधिक निर्भर करती है, जो स्वीकार्य नहीं है।
संगठन ने आगे कहा कि हालांकि तीन अलग-अलग विभागों से NOC लेने का प्रावधान है, लेकिन भूमि का भौतिक निरीक्षण कौन से अधिकारी करेंगे, इस संबंध में पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी गई है। पूवुलगिन नानबर्गल ने सरकार की इस जल्दबाजी की आलोचना की है और आरोप लगाया है कि औद्योगिक विकास के नाम पर कृषि भूमि निजी पक्षों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।
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