सोमनाथ मंदिर के पास मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध यथावत, हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश रोका
गुजरात हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए २६ दिसंबर की अगली तारीख तय की है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, शाम 5:41 · 3 मिनट का पाठ
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मिंट के अहवाल के मुताबिक, गिर सोमनाथ जिले में स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री पर प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेगा। गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (३० अक्टूबर) को सिंगल-जज की बेंच के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें इन प्रतिबंधों को रद्द कर दिया गया था। चीफ जस्टिस मनाश रंजन पाठक और जस्टिस निरंजर देसाई की बनी डिविजन बेंच ने गुजरात सरकार द्वारा दाखिल की गई ताकीद की अपील पर यह आदेश जारी किया था। इसके साथ अदालत ने स्पष्ट किया था कि गिर सोमनाथ जिला कलेक्टर द्वारा नियत क्षेत्रों में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने वाला नोटिफिकेशन फिलहाल अमल में रहेगा। डिविजन बेंच अब इस मामले की अगली सुनवाई २६ दिसंबर को करेगी।
इससे पहले शुक्रवार के दिन, जस्टिस निशा ठाकोर ने गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर के पास कारोबार चलाने वाले होटल और रेस्तरां के मालिकों द्वारा दाखिल की गई अर्जियों को मंजूर किया था और कलेक्टर के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था। सिंगल जज के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने तुरंत डिविजन बेंच के समक्ष चुनौती दी थी, जिसने देर शाम इस फैसले के अमल पर रोक लगा दी थी।
गिर सोमनाथ जिला कलेक्टर द्वारा १० अगस्त, २०२६ के दिन जारी किए गए इस नोटिफिकेशन में सोमनाथ मंदिर से ५०० मीटर की त्रिज्या क्षेत्र में मांसाहारी भोजन बनाने, उसका संग्रह करने और बिक्री करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, सोमनाथ तीर्थधाम सर्किट का हिस्सा बनने वाले और इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले छह विशेष रूप से पहचाने गए रास्तों पर भी ये प्रतिबंध लागू किए गए हैं। डिविजन बेंच द्वारा सिंगल जज के आदेश पर रोक लगाए जाने के कारण, अदालत के अगले आदेशों तक ये सभी प्रतिबंध यथावत रहेंगे।
दूसरी तरफ, होटल और रेस्तरां के मालिकों ने गुजरात हाईकोर्ट में अर्जी देकर दलील दी थी कि ये प्रतिबंध उनके कानूनी कारोबार करने और आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने मंदिर के आसपास के क्षेत्रों और तय किए गए यात्रा मार्गों पर मांसाहारी भोजन की बनावट, संग्रह और बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंधों को कलेक्टर के नोटिफिकेशन के माध्यम से चुनौती दी थी।
होटल और रेस्तरां मालिकों की अर्जियों का विरोध करते हुए, राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि कारोबार करने की संवैधानिक स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल की अनुकूलता को ध्यान में रखे बिना हर जगह किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि चलाने का हक रखता है। सरकार ने अपनी दलील में बताया था कि सोमनाथ कोई सामान्य व्यावसायिक नगर नहीं है, बल्कि लाखों हिंदुओं की अत्यंत गहरी आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने कलेक्टर के नोटिफिकेशन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का समर्थन किया था।
हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के यह रोक लगाने के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि इन प्रतिबंधों की वैधता को लेकर विवाद अभी जारी ही रहेगा, और अब यह मामला अगली सुनवाई के लिए २६ दिसंबर को हाथ में लिया जाएगा।
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