वीबी-जी राम जी योजना के लिए नए शिकायत निवारण नियम २०२६ घोषित
सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत योजनागत शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू की है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, दोपहर 1:57 · अपडेट दोपहर 12:14 · 5 मिनट का पाठ
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पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी (VB–G RAM G) अधिनियम के अंतर्गत वीबी-जी राम जी - शिकायत निवारण नियम, २०२६ (Grievance Redressal Rules, 2026) आधिकारिक तौर पर घोषित किए गए हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाली शिकायतों के निवारण के लिए एक सुव्यवस्थित, बहुस्तरीय और समयबद्ध ढांचा खड़ा करना है। इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया नागरिकों के लिए अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी, जिससे ग्रामीण परिवारों के अधिकार और पात्रता सुरक्षित रहें तथा नागरिकों की समस्याओं का उचित समय पर निवारण आ सके।
नए नियमों के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर समयबद्ध एवं बहुस्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था की स्थापना की जाएगी। जिस-उस उपयुक्त स्तर पर नियुक्त किए गए शिकायत निवारण अधिकारी शिकायतें स्वीकार करने, उनका रजिस्ट्रेशन करने, उनकी जांच करने और उनका निपटारा लाने के लिए जिम्मेदार होंगे। जिला स्तर पर जिला प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर इस पूरी व्यवस्था पर निगरानी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि शिकायतों का निपटारा निर्धारित पद्धति एवं डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से ही किया जाए।
योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी किसी भी बात पर कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सके, इसके लिए नियमों में अनेक माध्यमों का प्रावधान किया गया है। ग्राम पंचायत, ब्लॉक या जिला स्तर पर भौतिक रूप में (रूबरू या कागज के द्वारा) प्राप्त होने वाली शिकायतों को उसी दिन या यदि वह संभव न हो तो उसके अगले ही कामकाजी दिन पर निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर अनिवार्य रूप से दर्ज करके रजिस्टर करना होगा। शिकायत का रजिस्ट्रेशन होने के बाद आवेदक को एक रसीद दी जाएगी, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर, शिकायत मिलने की तारीख और शिकायत स्वीकार करने वाले अधिकारी का पदनाम दर्शाया जाएगा। डिजिटल माध्यम से भेजी गई शिकायतों के लिए यह रसीद इलेक्ट्रॉनिक रूप में मिलेगी और भौतिक रूप से मिली शिकायतों के लिए भौतिक रूप में दी जाएगी।
इन नियमों की एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी शिकायत को उसके फॉर्मेट, भाषा, प्रस्तुत करने के तरीके या किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत कमी के आधार पर रजिस्टर करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। इस प्रावधान से यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी नागरिक प्रक्रियागत आवश्यकताओं के कारण शिकायत निवारण प्रक्रिया का लाभ प्राप्त करने से वंचित न रह जाए। नियमों में शिकायतों की तीव्र जांच और समाधान के लिए निश्चित समय-सीमा तय की गई है। नियुक्त किए गए शिकायत निवारण अधिकारी प्रत्येक दर्ज शिकायत की जांच करेंगे और आवश्यक जांच करेंगे। इस प्रक्रिया के लिए अधिकारी संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड, रजिस्टर, दस्तावेज, रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा या अन्य जानकारी मांग सकते हैं।
जहां जरूरत लगे वहां शिकायत का निपटारा करने से पहले आवेदक को रूबरू या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपना पक्ष रखने का उचित अवसर प्रदान किया जाएगा। शिकायत मिलने की तारीख से ७ कामकाजी दिनों के भीतर उसकी जांच पूरी कर लेनी होगी। जांच पूरी होने के बाद शिकायत निवारण अधिकारी अपने निष्कर्ष दर्ज करके अधिनियम तथा नियमों के अनुसार उचित सुधारात्मक या उपचारक कदम उठाएंगे या उठवाएंगे। प्रत्येक शिकायत का अंतिम समाधान वह मिलने की तारीख से १५ दिन के भीतर लाना अनिवार्य है।
जांच के निष्कर्षों और उठाए गए कदमों की जानकारियां निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड की जाएंगी और आवेदक को इसकी जानकारी दी जाएगी। भौतिक रूप में प्राप्त हुई शिकायतों के मामलों में, उसका परिणाम और ली गई कार्रवाई की जानकारी आवेदक को भौतिक रूप में भी भेजी जाएगी। निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से शिकायतों की नोंदणी से लेकर उसके अंतिम निपटारे तक की पूरी प्रक्रिया की एंड-टू-एंड ट्रैकिंग की जा सकेगी। इससे जांच, निष्कर्ष और हुई कार्रवाई की इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग संभव होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही अधिक मजबूत होगी।
यदि कोई शिकायत निर्धारित १५ दिन की समयावधि में सुलझाए बिना की रहती है, तो उसे राज्य सरकार द्वारा स्थापित शिकायत निवारण व्यवस्था के अंतर्गत आगामी उच्च स्तर पर भेज दिया जाएगा। उच्च स्तर पर इस ऑटो-एस्केलेटेड शिकायत को प्राप्त करने वाला सत्ताधिकारी पूरे मामले की जांच करेगा और उसके निपटारे के लिए उचित कदम उठाएगा। ऐसी अनसुलझी शिकायतों का जब तक निराकरण न हो तब तक डिजिटल माध्यम से उसकी लगातार निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, इन नियमों के अंतर्गत शिकायत निवारण पद्धति के तहत दिए गए आदेशों के सामने अपील करने का भी प्रावधान रखा गया है। ऐसी अपीलें वीबी-जी राम जी अधिनियम, २०२५ की अनुसूची-१ के अनुसार दाखिल की जाएंगी और उनका निपटारा किया जाएगा।
सरकार इन नियमों के द्वारा वीबी-जी राम जी योजना के तहत नागरिक-केंद्रित, सुलभ और समयबद्ध शिकायत निवारण ढांचे को संस्थागत रूप देना चाहती है। बहुस्तरीय संस्थागत पद्धति, शिकायत करने के अनेक माध्यम, अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, निर्धारित समयसीमा, डिजिटल ट्रैकिंग और अनसुलझी शिकायतों को उच्च स्तर पर भेजने की व्यवस्था से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और योजना के क्रियान्वयन की कार्यक्षमता में सुधार होगा, ऐसा रिपोर्ट में बताया गया है।
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