अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के सताए गए अल्पसंख्यकों के लिए इमिग्रेशन राहत 2024 तक बढ़ाई गई
नए नियमों के तहत निर्दिष्ट समुदायों को पासपोर्ट और वीजा की कुछ आवश्यकताओं से छूट मिलेगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 6:08 · अपडेट दोपहर 12:31 · 3 मिनट का पाठ
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केंद्र सरकार ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण या उत्पीड़न के डर से भारत आए निर्दिष्ट अल्पसंख्यक समुदायों के लिए इमिग्रेशन राहत की अवधि 31 दिसंबर 2024 तक बढ़ा दी है। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा इमिग्रेशन और फॉरेनर्स (एक्जेंप्शन) ऑर्डर में संशोधन किया गया है, जिससे अब इन देशों के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोग, जो 31 दिसंबर 2024 को या उससे पहले भारत में दाखिल हुए हैं, उन्हें कुछ विशेष राहतें मिलेंगी।
इस नए संशोधन के तहत, जो व्यक्ति वैध पासपोर्ट, ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स या वीजा के बिना भारत में दाखिल हुए हैं, या जिनके वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज समय सीमा समाप्त होने के कारण एक्सपायर हो गए हैं, उन्हें इन दस्तावेजों की आवश्यकता से छूट दी जाएगी। हालांकि, इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रावधान के तहत आने वाले सभी व्यक्तियों के लिए भारत में अपने निरंतर प्रवास के लिए उचित श्रेणी का वीजा प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
इस निर्णय की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने इमिग्रेशन संबंधी राहत को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) में निर्दिष्ट समय सीमा से 10 वर्ष आगे बढ़ा दिया है। CAA के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के जो लोग 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे, उन्हें भारतीय नागरिकता के लिए एक विशेष मार्ग प्रदान किया गया है। लेकिन, नए संशोधन द्वारा 31 दिसंबर 2024 की जो समय सीमा तय की गई है, वह CAA के तहत नागरिकता प्राप्त करने की पात्रता को स्वतः विस्तारित नहीं करती है।
सरकार ने इस संशोधन के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की पात्रता और देश में कानूनी रूप से रहने के अधिकार के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया है। यह संशोधन एक ऐसी कानूनी व्यवस्था प्रदान करता है जिसके द्वारा उन अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों की इमिग्रेशन स्थिति का समाधान किया जा सके जो CAA की समय सीमा के बाद भारत आए हैं। जो लोग 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2024 के बीच भारत में दाखिल हुए हैं, वे अब केवल वैध पासपोर्ट, ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स या वीजा न होने के कारण 'अदस्तावेजी विदेशी' (undocumented foreigners) माने जाने से होने वाली कठिनाइयों से राहत पा सकेंगे।
इस प्रकार, नागरिकता और कानूनी निवास को अब अलग-अलग ट्रैक पर रखा गया है। जो लोग 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए थे और CAA के तहत निर्धारित अन्य शर्तें पूरी करते हैं, वे विशेष नागरिकता मार्ग के लिए पात्र रहेंगे। जबकि 2015 से 31 दिसंबर 2024 के बीच आए लोगों के लिए, इमिग्रेशन फ्रेमवर्क के तहत अलग प्रकार की राहत दी गई है, जिससे उनके प्रवास को उचित वीजा तंत्र के माध्यम से प्रबंधित किया जा सकेगा।
व्यावहारिक रूप से, इस कदम से उन लोगों को कानूनी संरक्षण मिलेगा जिनकी इमिग्रेशन स्थिति अनिश्चित थी, क्योंकि वे या तो वैध दस्तावेजों के बिना आए थे या उनके दस्तावेजों की अवधि समाप्त हो गई थी। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस संशोधन का राजनीतिक महत्व होने की भी संभावना है। ये संशोधित नियम 4 नवंबर से लागू हो गए हैं।
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