सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और प्रतिबंधों को लेकर वैश्विक स्तर पर मंथन
भारत सरकार 'सेफ हार्बर' नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 12:25 · अपडेट शाम 4:26 · 5 मिनट का पाठ
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और उनके द्वारा संचालित एल्गोरिदम के प्रभाव को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलने वाले 'ब्लैंकेट प्रोटेक्शन' यानी 'सेफ हार्बर' सुरक्षा कवच को हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। वर्तमान नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स द्वारा पोस्ट की जाने वाली सामग्री के लिए उन्हें कानूनी जिम्मेदारी से मुक्ति मिलती है, लेकिन अब सरकार एल्गोरिदम-आधारित कंटेंट के लिए इस सुरक्षा में बदलाव करने पर विचार कर रही है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध का मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है। एबीसी न्यूज और अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतिबंध को संवैधानिक चुनौती दी गई है। यह कानून फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स, किक, रेडिट, स्नैपचैट, टिकटॉक, ट्विच, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को 16 वर्ष से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को अकाउंट बनाने या रखने से रोकने के लिए बाध्य करता है। दिसंबर महीने में लागू हुए इस कानून के तहत अब तक लगभग 50 लाख सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक किए गए हैं।
इस कानून को चुनौती देने वाले 'डिजिटल फ्रीडम प्रोजेक्ट' और रेडिट का तर्क है कि यह प्रतिबंध संवैधानिक रूप से अनुचित है क्योंकि यह युवाओं को नागरिक संवाद और राजनीतिक चर्चाओं से वंचित रखता है। रेडिट के वकीलों का कहना है कि यह कानून युवाओं को वैश्विक स्तर पर अपनी बात रखने के अवसर से वंचित करता है, विशेष रूप से उस समूह के लिए जिसके पास मतदान का अधिकार नहीं है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई सरकार का दावा है कि यह प्रतिबंध बच्चों को सोशल मीडिया के जोखिमों से बचाने के लिए आवश्यक है। सरकार के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स विज्ञापन की आय प्राप्त करने के लिए यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं, जो बच्चों के लिए हानिकारक है।
दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के प्रीमियर पीटर मलिनास्की ने कहा था कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम तय करते हैं कि लोग क्या देखेंगे, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। इस मामले में अब ब्रिटेन स्थित 'फ्री स्पीच यूनियन' और अमेरिका की 'नेटचॉइस' जैसी संस्थाएं भी 'मित्र अदालत' के रूप में जुड़ना चाहती हैं। मोनाश यूनिवर्सिटी के संवैधानिक कानून के प्रोफेसर ल्यूक बेक के अनुसार, सरकार के पास इस मामले में मजबूत पक्ष है, लेकिन इस केस से सरकार की नियामक शक्ति की सीमा स्पष्ट होगी।
सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों की गंभीरता गुजरात के सूरत शहर में हुई एक घटना से भी समझी जा सकती है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सूरत में इंस्टाग्राम ग्रुप में साझा किए गए एक वीडियो को लेकर हुए विवाद में दो किशोरों की हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, 'सलमान खान' नामक इंस्टाग्राम ग्रुप में घुड़सवारी का एक वीडियो साझा किया गया था, जिस पर की गई टिप्पणी और अपशब्दों के आदान-प्रदान से मामला बिगड़ गया था। इस विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच मुलाकात तय हुई थी, जिसके दौरान 17 वर्ष के तीन नाबालिग आरोपियों ने मांस काटने वाले चाकू से हमला कर दो किशोरों की हत्या कर दी। पुलिस ने तीनों नाबालिग आरोपियों को हिरासत में ले लिया है।
इन घटनाओं ने सोशल मीडिया एल्गोरिदम और उस पर नियंत्रण को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है। भारत में जहां सरकार सेफ हार्बर नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है, वहीं ऑस्ट्रेलिया में अदालत का फैसला सोशल मीडिया के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए दृढ़ हैं और यह कानून समय के साथ आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है। रेडिट जैसी कंपनियों ने कहा है कि वे कानून का पालन करना जारी रखेंगी, लेकिन साथ ही वे अधिक प्रभावी सुरक्षा उपायों की वकालत भी कर रही हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स मूल रूप से ऐसी तकनीक हैं जो यूजर्स को एक-दूसरे से जोड़ने और जानकारी साझा करने के लिए बनाई गई थीं। पिछले दो दशकों में ये प्लेटफॉर्म्स वैश्विक संवाद का मुख्य माध्यम बन गए हैं। हालांकि, एल्गोरिदम-आधारित कंटेंट डिलीवरी और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के उनके तरीकों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विभिन्न देशों की सरकारें अब इन प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए कानूनी ढांचे में बदलाव कर रही हैं, ताकि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
इस समाचार का स्रोत
- Business Standard
- ABC News (Australia)
- Hindustan Times
- Al Jazeera
- दैनिक भास्कर
- ઇન્ડિયન એક્સપ્રેસ ગુજરાતી
- Business Standard
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