देर से भोजन करने की आदत से बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा
रात 9 बजे के बाद भोजन करने वालों में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारी का खतरा 28 प्रतिशत अधिक होने का शोध
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, सुबह 8:36 · अपडेट सुबह 10:40 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात भोजन करने और आधी रात को स्नैक्स खाने की बढ़ती आदत स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है। टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह अनियमित और असंतुलित खान-पान दिनचर्या का हिस्सा बन जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है। वर्ष 2023 में ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि एक लाख से अधिक युवाओं के डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि जो लोग रात 9 बजे के बाद अंतिम भोजन करते हैं, उनमें रात 8 बजे से पहले भोजन करने वालों की तुलना में सेरेब्रोवैस्कुलर यानी मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारी का खतरा 28 प्रतिशत अधिक देखा गया है। हालांकि, यह एक अवलोकन आधारित अध्ययन है, जो दोनों के बीच संबंध का संकेत देता है लेकिन यह सीधा सबूत नहीं है कि देर से भोजन करने से ही स्ट्रोक होता है।
शरीर में 24 घंटे की जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। यह नींद, हार्मोन, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। देर से बार-बार भोजन करने से इन प्रक्रियाओं पर असर पड़ता है। देर से भूख लगने पर लोग अक्सर चिप्स, नमकीन, मिठाइयां, तले हुए पदार्थ और पैक्ड स्नैक्स खाते हैं, जिनमें नमक, चीनी, कैलोरी और अस्वास्थ्यकर वसा अधिक होती है। इससे वजन बढ़ना, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोग रात में देर से खाने के कारण सुबह का नाश्ता भी छोड़ देते हैं, जो लंबे समय में मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जुड़ा है, जो स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है।
वर्ल्ड स्ट्रोक डे के अवसर पर ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के अनुसार, कावेरी अस्पताल के स्ट्रोक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. शिवराजण थंडेश्वरन और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरीश आर. कामथ ने जीवनशैली संबंधी खतरों जैसे खराब आहार, शारीरिक निष्क्रियता और अपर्याप्त नींद के बारे में चर्चा की थी। डॉ. कामथ के अनुसार, हर साल 18 लाख नए स्ट्रोक के मामले जुड़ते हैं और हर साल 72.5 लाख लोग स्ट्रोक के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं। स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा मुख्य कारण है, इसलिए 4.5 घंटे के विंडो पीरियड में उपचार मिलना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. थंडेश्वरन द्वारा सुझाव दिया गया है कि लोगों को बेहतर परिणामों के लिए नियमित जांच के माध्यम से अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में अस्पतालों को ‘स्ट्रोक-रेडी’ के रूप में पहचाने जाने के लिए NABH या JCI प्रमाणन प्राप्त करना चाहिए, लेकिन पश्चिमी देशों की तरह सरकार द्वारा कानून बनाकर मरीजों को व्यापक स्ट्रोक केंद्रों में ले जाकर उपचार देना अनिवार्य बनाना चाहिए ताकि समय बचे। बड़े शहरों के अस्पतालों में स्कैनिंग, इमेजिंग, थ्रोम्बोलिसिस और थ्रोम्बेक्टोमी जैसी सुविधाएं हैं, जबकि दूर-दराज के इलाकों में टेलीमेडिसिन का उपयोग मरीजों की पहचान करने और उन्हें व्यापक स्ट्रोक केंद्रों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है।
स्ट्रोक के लक्षणों में चेहरा एक तरफ झुक जाना, शरीर के हिस्से में कमजोरी या सुन्नता, बोलने में कठिनाई, दृष्टि कम होना या संतुलन खोना शामिल है। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। उपचार में समय पर मदद मिलने से परिणाम सुधरने की संभावना बढ़ती है। स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आहार में हरी सब्जियां, फल, अनाज और प्रोटीन लेना चाहिए। सोने और भोजन करने के बीच 2 से 3 घंटे का अंतर रखना हितकर है। व्यायाम करना, तंबाकू से दूर रहना और ब्लड प्रेशर तथा कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करना भी जरूरी है।
ન્યુઝીલેન્ડ સામે ટેસ્ટ શ્રેણી પૂર્વે બુમરાહ અને જાડેજા ઈન્ડિયા એ ટીમમાં સામેલ થશે
લિંકન ખાતે શનિવારથી શરૂ થતી ન્યુઝીલેન્ડ એ સામેની અંતિમ ચાર-દિવસીય મેચમાં દિગ્ગજ ખેલાડીઓ રમશે
BCI ने लॉ कोर्स के लिए आयु सीमा हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया
3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में अब उम्र का कोई बंधन नहीं रहेगा
સીબીઆઈએ કિશોર બિયાણી અને ફ્યુચર રિટેલ સામે ₹૯૦૪ કરોડની છેતરપિંડીનો કેસ દાખલ કર્યો
સ્ટેટ બેંક ઓફ ઈન્ડિયાની ફરિયાદ બાદ સીબીઆઈએ મુંબઈમાં સર્ચ ઓપરેશન હાથ ધર્યું