अमेरिका में डेमोक्रेट्स की जीत और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय शेयर बाजार में जोरदार उछाल
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणामों और कच्चे तेल की कीमतों में कमी के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी देखी गई।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 6:27 · अपडेट दोपहर 2:15 · 7 मिनट का पाठ
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर, 2026 को अभूतपूर्व तेजी देखी गई। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत, वैश्विक बाजारों में उत्साह और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों में बड़ा उछाल दर्ज किया गया। बाजार के मुख्य सूचकांक तीन महीने के उच्चतम स्तर के करीब खुले और दिन भर लगातार बढ़त बनाए रखी।
अमेर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार के दोपहर के सत्र में सेंसेक्स 2,123.12 अंकों की बढ़त के साथ 79,424.52 के स्तर पर पहुंच गया, जो 2.74 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इसी तरह, निफ्टी में भी 610.96 अंकों का बड़ा उछाल आया और यह 2.55 प्रतिशत बढ़कर 24,571.55 पर बंद हुआ। बाजार में यह तेजी दोपहर 1:49 से 1:55 के बीच स्पष्ट रूप से देखी गई। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर 1:45 बजे तक सेंसेक्स 2,000 अंक और निफ्टी 600 अंक से अधिक ऊपर पहुंच गया था, जबकि बंद होते समय सेंसेक्स 2,000 अंक और निफ्टी 576 अंकों की बढ़त के साथ स्थिर हुआ।
बाजार की इस तेजी के पीछे मुख्य कारणों में अमेरिका के मध्यावधि चुनाव परिणाम और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट शामिल है। अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की है, जिसे 'ब्लू स्वीप' के रूप में जाना जा रहा है। इन परिणामों के कारण वैश्विक बाजारों में उत्साह का माहौल देखा गया। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत की गिरावट से बाजार को बड़ा सहारा मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार चौथे दिन गिरकर 93.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का एक महत्वपूर्ण कारण ईरान के साथ संघर्ष में संभावित कमी और होर्मुज जलमार्ग के खुले रहने की संभावना भी है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की नेशनल सिक्योरिटी एंड फॉरेन पॉलिसी कमेटी के वाइस चेयरमैन अहमद हयात-मुगम्मद ने बताया कि भारत, चीन, इराक और कतर को होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की छूट दी गई है और उनके टैंकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर सकेंगे। इस घटनाक्रम के कारण कच्चे तेल की कीमतें दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गईं।
भारतीय रुपये में भी इस तेजी के कारण राहत देखी गई। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 29 पैसे मजबूत होकर 94.36 पर पहुंच गया, जो बुधवार को 94.65 था। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, रुपया दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया और 0.15 प्रतिशत बढ़कर 94.38 पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि, आयातकों द्वारा डॉलर की मांग के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही। डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट ने भी रुपये को सहारा दिया, क्योंकि अमेरिका में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद डॉलर इंडेक्स एक महीने के निचले स्तर पर आ गया था।
सेक्टर के अनुसार देखें तो ऑटो और आईटी (IT) क्षेत्र के सूचकांकों में 4 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई। अमेर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों ने इन क्षेत्रों के शेयरों में भारी खरीदारी की। रियल्टी क्षेत्र के सूचकांकों में भी 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। निफ्टी एफएमसीजी (FMCG) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सूचकांकों में भी 1 प्रतिशत से अधिक का लाभ हुआ। व्यापक बाजार में भी तेजी देखी गई, जिसमें निफ्टी स्मॉलकैप 250 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांकों में 0.75 प्रतिशत का उछाल आया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के कारण वैश्विक और स्थानीय दोनों हैं। एनडीटीवी में अश्विनी शामी (प्रेसिडेंट एंड पोर्टफोलियो मैनेजमेंट - ओम्नीसाइंस कैपिटल) ने बताया कि अमेरिका में विभाजित सरकार के परिणाम वैश्विक सेंटिमेंट में सुधार करेंगे। भारत के लिए बड़ा सहारा यूएस यील्ड में सुधार, एआई (AI) शेयरों में करेक्शन और कच्चे तेल की कीमतों में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट (जो 95 डॉलर से नीचे आ गया है) है, जो एफआईआई (FII - विदेशी संस्थागत निवेशकों) के आवंटन के लिए एक मजबूत मामला बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि कच्चे तेल की कम कीमतों से चालू खाता घाटे (करेंट अकाउंट डेफिसिट) में कमी आएगी, रुपये को सहारा मिलेगा और कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे विभिन्न क्षेत्रों पर मार्जिन का दबाव कम होगा। बैंकिंग, कंस्ट्रक्शन और पावर क्षेत्र इस तेजी से सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं।
दूसरी ओर, फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली ने नोट किया कि अमेरिका में डेमोक्रेट्स की विजयी जीत के कारण डॉलर पर दबाव बढ़ा है। वॉशिंगटन में संभावित विधायी बाधाओं के कारण डॉलर की तत्काल रिकवरी की संभावना कम है, जिससे डॉलर इंडेक्स में गिरावट देखी जा रही है।
गुरुवार की इस तेजी से पहले, बुधवार, 4 नवंबर, 2026 को भी बाजार में सकारात्मक रुख देखा गया था। अमेर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को सेंसेक्स 350 से अधिक अंक बढ़कर 77,219.65 पर बंद हुआ और निफ्टी 23,900 के स्तर को पार कर 23,911.70 पर बंद हुआ। बुधवार को सेंसेक्स में 301.80 अंक (0.39 प्रतिशत) और निफ्टी में 100.86 अंक (0.42 प्रतिशत) की वृद्धि हुई थी। उस समय मीडिया और रियल्टी शेयरों में मजबूती देखी गई, जबकि निफ्टी आईटी सूचकांक लाल निशान में नीचे चला गया था।
वैश्विक बाजारों में भी गुरुवार को मिश्रित प्रतिक्रिया देखी गई। एशियाई बाजारों में तेजी रही, जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया के बेंचमार्क सूचकांकों में वृद्धि हुई। इससे MSCI एशिया पैसिफिक सूचकांक 0.3 प्रतिशत ऊपर गया। अमेरिका में S&P 500 सूचकांक में 1.6 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हुई, जो पिछले तीन महीनों की सबसे बड़ी एक दिवसीय वृद्धि थी। टेक्नोलॉजी शेयरों वाले नैस्डैक 100 सूचकांक में भी 0.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अमेर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हांगकांग का हैंग सेंग 1.3 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 1.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जापान का टोपिक्स 0.9 प्रतिशत नीचे आया और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव उस देश की संसद के कुछ सदस्यों के चयन के लिए आयोजित होने वाले महत्वपूर्ण चुनाव हैं। भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को मापने के महत्वपूर्ण साधन थे।
इस समाचार का स्रोत
- अमर उजाला
- अमर उजाला
- The Hindu (business)
- NDTV
- Business Standard
- अमर उजाला
- आज तक
- Business Standard
- The National (UAE)
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