रामायण फिल्म में सीता के योद्धा स्वरूप पर सोशल मीडिया पर विवाद
सीता को युद्धभूमि में लड़ते दिखाने वाले दृश्य पर दर्शकों में रोष, वाल्मीकि रामायण के तथ्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, शाम 4:46 · अपडेट शाम 4:52 · 4 मिनट का पाठ
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रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश अभिनीत फिल्म 'रामायण' हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। यह फिल्म अपनी कहानी और कलाकारों के अभिनय के लिए काफी प्रशंसा बटोर रही है, लेकिन इसके साथ ही फिल्म का एक विवादास्पद सीन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। इस सीन में सीता की भूमिका निभा रही अभिनेत्री साई पल्लवी को जंगल में भगवान राम के साथ मिलकर राक्षसों से युद्ध करते हुए दिखाया गया है। इस दृश्य को लेकर दर्शकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है और लोग इसे पौराणिक तथ्यों के साथ गंभीर छेड़छाड़ मान रहे हैं।
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया यूजर्स इस सीन पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने इस फिल्म को 'स्कैमयाण' बताते हुए कहा कि यह रामायण के साथ एक और विश्वासघात है। यूजर्स का कहना है कि शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि जब भगवान राम ने खर-दूषण की 14,000 राक्षसों की सेना के खिलाफ युद्ध किया था, तब उन्होंने माता सीता और लक्ष्मण को सुरक्षित रूप से युद्धभूमि से दूर भेज दिया था। भगवान राम ने उस पूरी सेना का सामना अकेले ही किया था। एक अन्य यूजर ने टिप्पणी करते हुए बताया कि रामायण में उस युद्ध का वर्णन अत्यंत भयानक और कठोर है, जिसमें भगवान राम राक्षसों के रक्त से लथपथ थे। उस समय माता सीता का स्वरूप अत्यंत सौम्य और स्त्री-स्वभाव का था, और भगवान राम उन्हें कभी युद्ध के मैदान में प्रवेश नहीं करने देते।
कई लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि क्या फिल्म निर्माता अपनी मर्जी से पौराणिक कथाओं को बदल सकते हैं? लोगों का मानना है कि शूर्पणखा के भाई खर द्वारा बदला लेने के लिए भेजी गई 14,000 राक्षसों की सेना को हराने का कार्य केवल भगवान राम ने अकेले दम पर किया था। इस तथ्य को फिल्म में बदलकर सीता को भी राम के साथ लड़ते दिखाना मूल कहानी के बुनियादी सिद्धांतों के विरुद्ध है। सोशल मीडिया पर इस विषय पर लगातार चर्चा हो रही है और लोग अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।
इस विवाद के बीच प्रश्न यह उठता है कि वास्तविक ग्रंथों में क्या लिखा है? वाल्मीकि रामायण के संदर्भ के अनुसार, 14 वर्ष के वनवास के दौरान माता सीता ने राम के साथ किसी भी राक्षस-युद्ध में भाग नहीं लिया था। उस ग्रंथ के अनुसार, शूर्पणखा को लक्ष्मण ने पराजित किया था और उसके बाद राम तथा लक्ष्मण ने मिलकर राक्षसों के विरुद्ध युद्ध किया था। विशेष रूप से खर और दूषण की पूरी सेना के खिलाफ भगवान राम ने अकेले ही युद्ध किया था और विजय प्राप्त की थी।
हालांकि, इस विवाद के दूसरे पहलू के रूप में 'अद्भुत रामायण' का उल्लेख भी सामने आया है। इस ग्रंथ में सीता को देवी शक्ति के एक अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप के रूप में दर्शाया गया है। अद्भुत रामायण के अनुसार, जब भगवान राम सहस्र रावण के विरुद्ध युद्ध में हार जाते हैं, तब माता सीता महाकाली का रौद्र रूप धारण कर स्वयं राक्षसों का संहार करती हैं। इस प्रकार, अद्भुत रामायण के संदर्भ में सीता को एक योद्धा के रूप में दिखाया गया है। इसके बावजूद, वर्तमान फिल्म में जिस तरह से इस दृश्य को प्रस्तुत किया गया है, वह दर्शकों के एक बड़े वर्ग को स्वीकार्य नहीं है।
वाल्मीकि रामायण संस्कृत साहित्य के दो मुख्य महाकाव्यों में से एक है। ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित यह ग्रंथ भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों का वर्णन करता है। पारंपरिक रूप से, इस ग्रंथ को भारतीय संस्कृति और धर्म का मुख्य आधार माना जाता है, जिसमें सीता को आदर्श भारतीय नारी और सहनशीलता के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। ऐतिहासिक रूप से, इस ग्रंथ में सीता के चरित्र को गंभीरता और मर्यादा के साथ प्रस्तुत करने की परंपरा रही है, जिसके कारण जब भी उनके चरित्र के साथ कोई बदलाव किया जाता है, तो लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
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