ओपन जेल का कैदी गया था थाईलैंड, जेल वार्डर की मदद से बिताए पांच दिन
जेल रिकॉर्ड में उपस्थिति दर्ज कराने वाले वार्डर को निलंबित किया गया, FIR दर्ज
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:55 · अपडेट सुबह 3:37 · 4 मिनट का पाठ
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राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की ओपन जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा एक हत्यारा जेल वार्डर की मिलीभगत से पांच दिनों के लिए थाईलैंड घूमने गया था। इस पूरी घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब यह कैदी विदेश में था, तब भी जेल के आधिकारिक रिकॉर्ड में उसकी उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। इस घोटाले का खुलासा होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस कैदी का नाम दीक्षांत कामरा है। इस मामले का पर्दाफाश एक महिला की शिकायत के बाद हुआ। जेल महानिदेशक अशोक राठौड़ ने बताया कि हाल ही में एक महिला अपने परिवार के साथ उनके कार्यालय आई थी। इस महिला ने दीक्षांत कामरा पर उसे धोखा देने और मानसिक रूप से परेशान करने का गंभीर आरोप लगाया था। महिला ने आगे बताया कि कामरा के पास हथियार हैं और वह नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार में संलिप्त है। इसके साथ ही महिला ने खुलासा किया कि कामरा जेल में होने के बावजूद विदेश यात्रा कर आया है।
महिला की इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जेल महानिदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि शाम के समय कैदियों की जो गिनती यानी रोल कॉल की जाती है, उस पर खास नजर रखी जाए। जब जांच की गई तो रिकॉर्ड के अनुसार दीक्षांत कामरा जेल में ही उपस्थित दिख रहा था। इसके बाद जब पुलिस द्वारा उसकी गाड़ी की तलाशी ली गई, तो गाड़ी से अफीम बरामद हुई। इस मामले में पुलिस ने उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
गाड़ी से अफीम मिलने के बाद जेल महानिदेशक ने दीक्षांत कामरा के पासपोर्ट का विवरण प्राप्त किया। पासपोर्ट की जांच के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कामरा 9 अक्टूबर 2025 को थाईलैंड गया था और 13 अक्टूबर को भारत लौटा था। इस प्रकार, वह कुल पांच दिन विदेश में रहा, लेकिन इस अवधि के दौरान जेल के रजिस्टर में उसकी उपस्थिति दर्ज की गई थी।
जेल महानिदेशक अशोक राठौड़ ने इस विदेश यात्रा और जेल के उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। जांच में उस कर्मचारी की पहचान हुई जिसने कामरा की फर्जी उपस्थिति दर्ज की थी। इस गंभीर लापरवाही और मिलीभगत के लिए जेल महानिदेशक ने दीक्षांत कामरा और जेल वार्डर हापुरम के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस घटना के बाद वार्डर हापुरम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठा है कि 2018 में जब कामरा की गिरफ्तारी हुई थी, तब उसका पासपोर्ट जब्त क्यों नहीं किया गया, जिसके कारण वह विदेश जाने में सक्षम हो पाया।
दीक्षांत कामरा 2018 में जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में हुए दुष्यंत हत्याकांड का दोषी है। इस मामले में प्रिया सेठ, कामरा और उसके साथियों ने दुष्यंत का अपहरण किया था और उसके पिता से 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। रिपोर्ट के अनुसार, दुष्यंत के खाते में 3 लाख रुपये जमा होने के बाद आरोपियों ने उसका गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। हत्या के बाद आरोपियों ने चाकू से उसका चेहरा बिगाड़ दिया और शव को सूटकेस में भरकर आमेर इलाके में फेंक दिया था। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद 2018 में दीक्षांत कामरा और प्रिया सेठ की गिरफ्तारी की गई थी।
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