सबरीमाला घी विवाद में मिल्मा यूनियन को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
केरल हाईकोर्ट ने तिरुवनंतपुरम क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की बर्खास्त प्रबंध समिति को पुनर्गठित करने का आदेश दिया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 4:11 · 3 मिनट का पाठ
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केरल सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए, केरल हाईकोर्ट ने तिरुवनंतपुरम क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की बर्खास्त की गई प्रबंध समिति को फिर से कार्यरत करने का आदेश दिया है। यह संघ सबरीमाला मंदिर को घी आपूर्ति करने के मामले में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विवाद में था, जिसके चलते राज्य सरकार ने इसकी प्रबंध समिति को भंग कर दिया था। 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने रजिस्ट्रार के आदेश को रद्द कर दिया है और पूर्व के सिंगल बेंच के फैसले को भी दरकिनार कर दिया है।
न्यायमूर्ति ए.के. जयशंकर नंबियार और न्यायमूर्ति ए.के. प्रीथा की डिवीजन बेंच ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इससे पहले, सिंगल बेंच ने रजिस्ट्रार के निर्णय को सही ठहराया था और माना था कि सबरीमाला सन्निधि में घी की आपूर्ति में अनियमितता के आरोपों को साबित करने के लिए रजिस्ट्रार के पास पर्याप्त सामग्री थी। हालांकि, डिवीजन बेंच ने इस तर्क को खारिज कर दिया है और निर्देश दिया है कि पुनर्गठित प्रबंध समिति को अब नियुक्त प्रशासक का स्थान लेना चाहिए।
अदालत ने नोट किया कि रजिस्ट्रार ने डेयरी डेवलपमेंट निदेशालय के संयुक्त निदेशक की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर संघ की समिति को सुपरसीड किया था। डिवीजन बेंच के अनुसार, संयुक्त निदेशक के पास आरोपों से संबंधित पर्याप्त जानकारी उपलब्ध थी, जिसका अर्थ है कि समिति के सदस्यों ने जांच में पूर्ण सहयोग किया था। राज्य सरकार द्वारा सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या उन्हें छिपाने के आरोपों को अदालत ने खारिज कर दिया था। अदालत ने अवलोकन किया कि जब किसी वैधानिक प्राधिकरण द्वारा की गई कार्रवाई के पीछे तर्क का अभाव होता है, तो यह उस प्राधिकरण की सद्भावना पर संदेह पैदा करता है।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केरल को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 1969 के तहत समिति को सुपरसीड करने का रजिस्ट्रार का आदेश राज्य सहकारी संघ के साथ परामर्श किए बिना लिया गया था। रजिस्ट्रार ने तर्क दिया था कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कारण बताओ नोटिस देना व्यावहारिक नहीं था। दूसरी ओर, बर्खास्त समिति के सदस्यों ने वकील रणजीत थाम्पन और पी.सी. शशिधरन के माध्यम से तर्क दिया कि रजिस्ट्रार के पास लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई समिति को हटाने के लिए कोई ठोस सामग्री नहीं थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है और बिना कारण बताओ नोटिस दिए कार्रवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में ही की जा सकती है।
इस विवाद में शामिल तिरुवनंतपुरम क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ चार जिलों - तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पतनमथिट्टा और अलाप्पुझा को शामिल करता है। यह संघ केरल के सहकारी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो दूध और डेयरी उत्पादों के वितरण और सबरीमाला जैसे धार्मिक स्थलों पर घी की आपूर्ति का प्रबंधन करता है।
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