बकाया डीए के मामले में पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
उच्चतम न्यायालय ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 1:13 · 4 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब के मुख्य सचिव के.पी. सिंह के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया भुगतान के संबंध में राज्य सरकार के निर्देशों का पालन न करने के कारण की गई थी। शीर्ष अदालत ने यह आदेश इस विवाद में शीर्ष नौकरशाह को जेल भेजने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए दिया है।
जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने यह निर्णय तब लिया जब राज्य सरकार और अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को सूचित किया कि जिस मामले का निपटारा हो चुका है, उसी विषय पर उच्च न्यायालय द्वारा सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की जा रही है। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, "आप मुख्य सचिव को जेल भेजने में इतनी रुचि क्यों ले रहे हैं? हम अवमानना पर रोक लगाएंगे। अन्य कार्यवाहियां जारी रह सकती हैं।"
याचिकाकर्ता मंजीत सिंह रंधावा की ओर से पेश अधिवक्ता रवि शर्मा ने अदालत में तर्क दिया कि मुख्य सचिव ने सभी विभागों को एक आंतरिक संदेश भेजा था, जिसमें कहा गया था कि अदालत के आदेशों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा इस आंतरिक संदेश पर भरोसा करने पर आपत्ति जताई। पीठ ने कहा, "आप इस आंतरिक संदेश के आधार पर अवमानना के लिए दबाव नहीं डाल सकते। हम दबाव बनाने के ऐसे तरीके को पसंद नहीं करते। विभागीय संदेशों के कारण आप आपराधिक अवमानना शुरू नहीं कर सकते।"
अदालत ने आगे सवाल किया कि यदि मुख्य सचिव यह सलाह देते हैं कि अदालत के आदेश का पालन न किया जाए क्योंकि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने का इरादा रखती है, तो क्या वह अपने आप में आपराधिक अवमानना माना जाएगा? अदालत ने उच्च न्यायालय के 12 अक्टूबर और 13 अक्टूबर के आदेशों की समीक्षा की, जिसमें सिंह को गुरुवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि यह है कि पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार, राज्य में सेवा देने वाले ऑल इंडिया सर्विसेज अधिकारियों पर लागू दरों पर बकाया डीए और डीआर (महंगाई राहत) की किस्तें देने के उच्च न्यायालय के 3 अगस्त के निर्देशों का पालन नहीं किया था। उच्च न्यायालय ने सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को विलंबित भुगतान पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ पखवाड़े में बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। राज्य द्वारा इस समय सीमा को पूरा करने में विफल रहने पर कर्मचारी और पेंशनभोगी उच्च न्यायालय पहुंचे थे।
12 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने सिंह को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इसके बाद उच्च न्यायालय ने उन्हें 5 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा था। उच्च न्यायालय ने यह सवाल भी उठाया था कि केवल सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने से राज्य को उसकी जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं मिलती, जब तक कि उच्चतम न्यायालय आदेश पर रोक न लगा दे या उसमें बदलाव न करे। अवमानना याचिका में जवाब दाखिल करने में विफलता के कारण उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया था।
उच्च न्यायालय में दायर स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, सिंह ने बताया कि 1 जुलाई, 2021 से 30 सितंबर, 2026 की अवधि के लिए राज्य की बकाया डीए/डीआर देनदारी ₹22,818 करोड़ है, जबकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के प्रति कुल बकाया देनदारी ₹32,418 करोड़ है।
के.पी. सिंह पंजाब के मुख्य सचिव के रूप में सेवा दे रहे हैं और वे राज्य के प्रशासनिक तंत्र के उच्च अधिकारी हैं।
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