डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कोर्ट जमानत न दे, ऐसा निर्देश दे सकती है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी को 'डिजिटल लूट' करार देते हुए कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
29 अक्टूबर 2026, सुबह 3:16 · अपडेट सुबह 2:42 · 3 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से होने वाली साइबर धोखाधड़ी को 'डिजिटल लूट' के रूप में पहचाना है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह अपराध सामान्य रंगदारी लेने से कहीं अधिक गंभीर है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि ऐसे निर्दयी अपराधियों के खिलाफ अत्यंत कठोरता से निपटा जाना चाहिए और यदि कानून में ट्रायल से पहले सजा देने का प्रावधान हो, तो उसका उपयोग किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कोर्ट जमानत न दे, ऐसा निर्देश दे सकती है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी.Mohan की बेंच गौरव कुमार साहा और निधि भंडारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने 12 राज्यों में दर्ज 35 साइबर अपराध के मामलों को एक स्थान पर लाने की मांग की थी। उन पर आरोप है कि उनकी कंपनी के बैंक खाते का उपयोग धोखाधड़ी के पैसे जमा करने और आगे भेजने के लिए किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि वे स्वयं धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं और उनकी जानकारी के बिना उनके खाते का उपयोग किया गया था। इस संबंध में कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की सुविधा के लिए पीड़ितों को दिल्ली नहीं बुलाया जा सकता और अलग-अलग राज्यों में चल रही जांच को प्रभावित करने की अनुमति भी नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल फ्रॉड के माध्यम से हुई ₹54,000 करोड़ की धोखाधड़ी को लूट और डकैती करार दिया है। कोर्ट ने नोट किया कि यह राशि कई छोटे राज्यों के बजट से भी अधिक है। इसलिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में दिशा-निर्देश बनाने को कहा है। इससे पहले 28 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट को आपराधिक कानून में औपचारिक रूप से परिभाषित करने और इसे कड़ी सजा के साथ एक अलग अपराध घोषित करने पर विचार करने को कहा था।
बेंच ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत मिलने के बाद उनकी संपत्ति फ्रीज की जा सकती है। साइबर सुरक्षा कंपनी आर्कटिक वुल्फ के अनुसार, त्योहारों के दौरान ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ने से साइबर धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ सकता है। अपराधी भारी डिस्काउंट, पार्सल डिलीवरी, बैंक अलर्ट, केवाईसी अपडेट और बिजली बिल के नाम पर फर्जी मैसेज भेज सकते हैं। एसएमएस, व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से भेजे गए लिंक से निजी जानकारी चोरी की जा सकती है।
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