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औद्योगिक रेफ्रिजरेशन और कोल्ड चेन पर साइबर हमले: तापमान का गंभीर जोखिम

वैश्विक सुपरमार्केट्स और दवा भंडारों में इंटरनेट से जुड़े कंट्रोलर्स पर साइबर हमले बढ़े हैं। यूएस एफबीआई और रक्षा एजेंसियों ने ऑनलाइन सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाने की कड़ी चेतावनी जारी की है।

आवतीकाल AI डेस्क7 नवंबर 2026 · 5 मिनट का पाठ
औद्योगिक पीआईडी कंट्रोलर्स जो डिजिटल प्रक्रिया मान और स्टेटस लाइट्स प्रदर्शित करते हैं।
औद्योगिक पीआईडी कंट्रोलर्स जो डिजिटल प्रक्रिया मान और स्टेटस लाइट्स प्रदर्शित करते हैं।
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घटना क्या है और क्यों इतनी गंभीर है?

विश्वभर में खाद्य पदार्थों, औषधियों और ताजे उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली कोल्ड चेन (cold chain: तापमान-संवेदनशील वस्तुओं के रखरखाव की श्रृंखला) सिस्टम्स अब साइबर अपराधियों के निशाने पर आ गई हैं। यूनाइटेड स्टेट्स की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) और अन्य सरकारी नियामक एजेंसियों ने हाल ही में औद्योगिक कूलर्स और रेफ्रिजरेट्स को लक्षित करके किए जाने वाले साइबर हमलों (cyber-attacks) को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।

हैकर विशेष रूप से ऐसे औद्योगिक रेफ्रीजरेसन कंट्रोलर (refrigeration controller: फ्रिज या कूलर का तापमान नियंत्रित करने वाला डिजिटल उपकरण) की कमियों का लाभ उठा रहे हैं जो अनपैच्ड (unpatched: सुरक्षा अपडेट के बिना) हैं या सीधे इंटरनेट से जुड़े हैं। इन सिस्टम्स पर कब्जा पाकर हैकर्स तापमान में खतरनाक बदलाव कर सकते हैं या अनधिकृत डीफ्रॉस्ट साइकिल (defrost cycle: बर्फ पिघलाने की स्वतः चलने वाली प्रक्रिया) शुरू कर सकते हैं, जिससे अरबों रुपये का सामान खराब हो सकता है और आग लगने का जोखिम भी पैदा हो सकता है।

औद्योगिक कंट्रोल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला सीमेंस PLC रैक और कनेक्टेड मॉड्यूल्स।
औद्योगिक कंट्रोल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला सीमेंस PLC रैक और कनेक्टेड मॉड्यूल्स। (Mixabest, Public domain, Wikimedia Commons)

हैकिंग की तकनीकी प्रक्रिया और कंट्रोल सिस्टम्स

आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और सुपरमार्केट्स में तापमान के प्रबंधन के लिए प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर (PLC) और स्मार्ट वाल्व पोजिशनर जैसी डिजिटल प्रणालियों का उपयोग किया जाता है। जब ये औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियां इंटरनेट से कनेक्ट होती हैं तब यदि उचित फायरवॉल या पासवर्ड सुरक्षा न हो, तो बाहरी हैकर्स नेटवर्क में सेंध लगा सकते हैं.

एक बार सिस्टम का एक्सेस मिलने के बाद, साइबर अपराधी रेफ्रीजरेसन यूनिट के सेंसर्स और तापमान सेटिंग्स के साथ छेड़छाड़ करते हैं। तापमान अचानक बढ़ा देने से या कूलिंग बंद कर देने से संग्रहित भोजन और औषधियां पल भर में खराब हो जाती हैं। इसके अलावा डीफ्रॉस्ट हीटर्स को लगातार चालू रखने से वायरिंग ओवरहीट होकर आग की दुर्घटना भी पैदा कर सकती है।

कोल्ड चेन रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर साइबर हमले के चरणहैकिंग प्रक्रिया और तापमान छेड़छाड़ के विभिन्न चरण
  1. असुरक्षित कंट्रोलर की खोजहैकर इंटरनेट से सीधे जुड़े हुए और अनपैच्ड रेफ्रीजरेसन कंट्रोलर्स ढूंढ निकालते हैं।
  2. सिस्टम का गैरकानूनी कब्जाकमजोर पासवर्ड या सॉफ्टवेयर खामी का लाभ लेकर कंट्रोलर सिस्टम में प्रवेश करते हैं।
  3. तापमान सेटिंग्स में बदलावकूलिंग बंद करना या डीफ्रॉस्ट साइकिल चालू करके तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंचाना।
  4. सामग्री का नुकसान और जोखिमभोजन और टीके खराब हो जाना या ओवरहीटिंग के कारण शॉर्ट सर्किट और आग का जोखिम।

यूरोपीय दुर्घटना और तापमान के सांख्यिकीय परिमाप

यह चेतावनी कागज पर की गई संभावना नहीं बल्कि एक वास्तविक संकट बन चुकी है। अक्टूबर 2026 में यूरोपीय सुपरमार्केट फ्रेंचाइजी में हुए साइबर हमले के कारण रेफ्रिजरेटर का तापमान अचानक बढ़कर 50 डिग्री सेल्सियस (50 °C) तक पहुंच गया था। इस घटना के कारण भारी मात्रा में खाद्य सामग्री और बर्फ पिघल जाने से बड़ा नुकसान हुआ था और इस सामग्री को फेंकना पड़ा था। इस हमले के पीछे कौन अपराधी थे, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।

दवाओं और टीकों के लिए तापमान का सटीक पालन अत्यंत आवश्यक है। सामान्यतः फार्मास्युटिकल कोल्ड चेन के लिए २ से ८ डिग्री सेल्सियस (2 to 8 °C) तापमान की आवश्यकता होती है। परंतु कुछ विशिष्ट टीकों के लिए अत्यंत कम तापमान की आवश्यकता पड़ती है, जैसे कि फ्रोजन चेन के लिए -२० डिग्री सेल्सियस और अल्ट्रा-लो या डीप फ्रीज के लिए -७० डिग्री सेल्सियस (-70 °C) तापमान आवश्यक है। यदि हैकर्स इस तापमान में थोड़ा भी फेरबदल करते हैं तो टीके निष्क्रिय हो जाते हैं।

कोल्ड चेन आवश्यक तापमान बनाम यूरोप हमले का तापमानडिग्री सेल्सियस में तापमान की तुलना
यूरोप हमले में सुपरमार्केट फ्रिज तापमान50°C
सामान्य फार्मा / फ्लू वैक्सीन उच्च सीमा8°C
सामान्य फार्मा / फ्लू वैक्सीन निम्न सीमा2°C
फ्रोजन वैक्सीन आवश्यकता (Varicella/Zoster)-20°C
डीप फ्रीज अल्ट्रा-लो (Pfizer/Ebola)-70°C
विभिन्न उत्पादों के लिए कोल्ड चेन तापमान के मानकस्रोत: विकिपीडिया कोल्ड चेन जानकारी आंकड़े
श्रेणी / कोल्ड चेन प्रकारआवश्यक तापमान (°C)उदाहरण और उपयोगी सामग्री
अльтра-लो / डीप फ्रीज-70 °Cइबोला और Pfizer-BioNTech कोविड-19 वैक्सीन
फ्रोजन चेन-20 °Cवेरिसेला (चेचक) और ज़ोस्टर वैक्सीन
रेफ्रिजरेटेड चेन2 से 8 °Cअधिकांश फ्लू वैक्सीन और सामान्य औषधियां
ताजी कृषि उपजपरिवेश के अनुसार नियंत्रितसब्जियां, सी-फूड और ताजे खाद्य पदार्थ

कोल्ड चेन का इतिहास और उसका महत्व

कोल्ड चेन का इतिहास औद्योगिक क्रांति से जुड़ा हुआ है। "कोल्ड चेन" शब्द का प्रथम उपयोग १९०८ में हुआ था, जबकि प्रथम प्रभावी कोल्ड स्टोर यूके के सेंट कैथरीन डॉक्स में १८८२ में शुरू हुआ था, जो ५९,००० पशुओं के मांस के भंडारण की क्षमता रखता था। १९३८ में फ्रेडरिक मिशेनली जोन्स (Frederick McKinley Jones) और जोसेफ ए. नुमेरो (Joseph A. Numero) ने मोबाइल यांत्रिक रेफ्रिजरेशन की खोज की और Thermo King कॉरपोरेशन की स्थापना की, जिसका पेटेंट १२ जुलाई १९४० के दिन मिला था।

१९५० के दशक से इस तकनीक का उपयोग जैविक सामग्रियों और टीकों के लिए व्यापक बना। २०२० की कोविड-१९ महामारी के दौरान Pfizer-BioNTech और Ebola जैसे टीकों के लिए -७० डिग्री सेल्सियस के अल्ट्रा-कोल्ड भंडारण की आवश्यकता उत्पन्न हुई थी। उस समय दुनिया के मात्र २५ से ३० देशों के पास ही ऐसा अल्ट्रा-कोल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध था, जो दर्शाता है कि यह क्षेत्र कितना संवेदनशील है।

आइस पैक्स और वैक्सीन की बोतलों के साथ कोल्ड चेन ट्रांसपोर्ट बॉक्स।
आइस पैक्स और वैक्सीन की बोतलों के साथ कोल्ड चेन ट्रांसपोर्ट बॉक्स। (GiveWell, CC BY 3.0, Wikimedia Commons)

यूएस एजेंसियों की चेतावनी और सिफारिशें

५ नवंबर २०२६ के दिन द यूनाइटेड स्टेट्स गवर्नमेंट की महत्वपूर्ण एजेंसियों - CISA (Cybersecurity and Infrastructure Security Agency), FBI, HHS (Health and Human Services), USDA (Department of Agriculture), और DOT (Department of Transportation) ने संयुक्त रूप से इस साइबर खतरे को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

FBI के साइबर ब्रांच ऑपरेशंस डायरेक्टर ब्रेट लीदरमैन (Brett Leatherman) के अनुसार: "औद्योगिक रेफ्रिजरेशन और कोल्ड-चेन मॉनिटरिंग सिस्टम्स भोजन, दवा और अन्य तापमान-संवेदनशील उत्पादों की रक्षा करते हैं, जो उन्हें दुर्भावनापूर्ण साइबर कलाकारों के लिए आकर्षक लक्ष्य बनाते हैं। हम वैश्विक स्तर पर जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में इन सिस्टम्स को लक्षित होते देख रहे हैं, जो सामान और उपकरणों को खतरे में डालते हैं।"

एफबीआई द्वारा जारी की गई फैक्टशीट में इन संस्थानों को तत्काल कदम उठाने की सिफारिश की गई है: कंट्रोल सिस्टम उपकरणों को सार्वजनिक इंटरनेट से अलग करना (de-link), पासवर्ड सुरक्षा मजबूत करना, सॉफ्टवेयर पैच नियमित रूप से अपडेट करना और सुरक्षा अपडेट्स प्राप्त न करने वाले पुराने (legacy) उपकरणों को बदल देना।

एफबीआई द्वारा अनुशंसित साइबर सुरक्षा उपायकोल्ड स्टोरेज संचालकों के लिए सुरक्षा सोपान
  1. इंटरनेट से डी-लिंक करनाऔद्योगिक कंट्रोल सिस्टम उपकरणों को सार्वजनिक इंटरनेट से तुरंत अलग करें।
  2. पासवर्ड सुरक्षा बढ़ानासिस्टम के सभी लॉगिन एक्सेस के लिए जटिल और मजबूत पासवर्ड सेट करें।
  3. सुरक्षा पैच अप्लाई करनासिस्टम सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर को नियमित सिक्योरिटी पैच से अपडेट रखें।
  4. पुराने उपकरण बदलनाजो लेगेसी डिवाइस को सुरक्षा अपडेट न मिलते हों उसे नए सुरक्षित मॉडल्स से बदलें।
स्मार्ट वाल्व पोजीशनर के साथ 4-20 mA करंट लूप कंट्रोल सिस्टम का तकनीकी डायग्राम।
स्मार्ट वाल्व पोजीशनर के साथ 4-20 mA करंट लूप कंट्रोल सिस्टम का तकनीकी डायग्राम। (Dougsim, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

भारत और आम नागरिकों पर असर

एफबीआई जैसी संस्थाएं (जिसका वित्तीय वर्ष 2019 का बजट $9.6 बिलियन और 2021 का नॉन-कन्स्ट्रक्शन बजट निवेश $9,748,829,000 था) वैश्विक कानून प्रवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत में भी डिजिटल सप्लाई चेन और कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क तेजी से विस्तृत हो रहे हैं। भारतीय कृषि उत्पादों, डेयरी उद्योग और फार्मास्युटिकल निर्यात के लिए कोल्ड चेन रीढ़ की हड्डी के समान है।

यदि ऐसे साइबर हमले भारतीय कोल्ड स्टोरेज या वैक्सीन डिपो पर होते हैं, तो देश में खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर परिणाम आ सकते हैं। इसलिए भारतीय औद्योगिक इकाइयों के लिए भी अपने औद्योगिक कंट्रोलर्स और सेंसर्स की साइबर सुरक्षा ऑडिट करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

स्रोत

  1. apps.apple.com
  2. the-hindu-science
  3. Wikipedia
  4. Wikipedia

टेक

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