आत्मनिर्भर आकाश: तेजस और AMCA के साथ भारतीय वायुसेना का स्वदेशी फाइटर जेट रोडमैप
वायुसेना के नए प्रमुख ने लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या बढ़ाने और स्वदेशी तकनीक पर जोर देते हुए तेजस और पांचवीं पीढ़ी के AMCA प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी है।

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) इस समय एक ऐतिहासिक परिवर्तन की दहलीज पर खड़ी है। वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कार्यभार संभालते ही देश की हवाई सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट और मजबूत रोडमैप प्रस्तुत किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नए वायुसेना प्रमुख की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में लड़ाकू स्क्वाड्रन (squadron) यानी विमानों के समूह की संख्या में वृद्धि करना और स्वदेशी विमान परियोजनाओं को गति देना शामिल है। इस रणनीति के केंद्र में दो मुख्य विमान हैं: तेजस (HAL Tejas) और पांचवीं पीढ़ी का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA)।
भारतीय वायुसेना का इतिहास गौरवशाली रहा है। विकिपीडिया के डेटा के अनुसार, इसकी स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश भारत में एक सहायक वायुसेना के रूप में की गई थी। 1 अप्रैल 1933 को वायुसेना ने अपनी पहली स्क्वाड्रन शुरू की थी, जिसमें केवल 4 वेस्टलैंड वापिटी बायप्लेन और 5 भारतीय पायलट थे। आज 1 जनवरी 2025 तक वायुसेना में 1,35,000 जवान कार्यरत हैं। इतने बड़े सैन्य बल को आधुनिक रखने के लिए विदेशी निर्भरता कम करके स्वदेशी तकनीक अपनाना अनिवार्य हो गया है। एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने जोर देकर कहा है कि तेजस और AMCA परियोजनाएं न केवल रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए, बल्कि भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
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तेजस (HAL Tejas) भारत का पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) है। यह एक हल्का, मल्टी-रोल यानी बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है जो दुश्मन के विमानों के साथ हवा में लड़ने के अलावा जमीन पर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता रखता है। तेजस की डिजाइन इस तरह तैयार की गई है कि यह हिमालय के ऊंचे पहाड़ों से लेकर रेगिस्तान के गर्म वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम कर सके। इस विमान में अत्याधुनिक एविओनिक्स (avionics) यानी विमान में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और रडार सिस्टम लगाए गए हैं। वायुसेना के रोडमैप के अनुसार, तेजस के विभिन्न मॉडल जैसे मार्क-1ए (Mk-1A) और भविष्य में मार्क-2 (Mk-2) पुराने हो चुके विमानों का स्थान लेंगे।
| वर्ष | घटना/विवरण |
|---|---|
| 1932 | 8 अक्टूबर को वायुसेना की आधिकारिक स्थापना |
| 1933 | प्रथम स्क्वाड्रन का गठन (4 विमानों के साथ) |
| 1945 | राजा जॉर्ज छठे द्वारा 'रॉयल' शब्द जोड़ा गया |
| 1950 | भारत के गणतंत्र बनने पर 'रॉयल' शब्द हटाया गया |
| 2025 | 1,35,000 सक्रिय जवानों के साथ आधुनिक सेना |
जब हम भविष्य की बात करते हैं, तब AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (Advanced Medium Combat Aircraft) सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है। यह पांचवीं पीढ़ी (fifth-generation) का फाइटर जेट है। पांचवीं पीढ़ी के विमान की सबसे बड़ी विशेषता उसकी स्टील्थ (stealth) तकनीक होती है। स्टील्थ का अर्थ है रडार से बचने की क्षमता। इस विमान की सतह और आकार को इस तरह बनाया जाता है कि यह रडार की तरंगों को वापस भेजने के बजाय बिखेर देता है, जिससे दुश्मन के रडार में विमान दिखाई नहीं देता। एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने इस परियोजना को शीर्ष प्राथमिकता दी है क्योंकि यह भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की कतार में लाकर खड़ा कर देगी।

- संकल्पना और डिज़ाइनवायुसेना की जरूरतों के अनुसार विमान का आकार और क्षमताएं तय की जाती हैं।
- प्रोटोटाइप निर्माणपरीक्षण के लिए विमान के प्रारंभिक नमूने तैयार किए जाते हैं।
- ग्राउंड और फ्लाइट टेस्टिंगविमान को जमीन पर और हवा में विभिन्न परिस्थितियों में परखा जाता है।
- श्रेणीबद्ध उत्पादनपरीक्षण सफल होने के बाद HAL जैसी संस्थाओं द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होता है।
- वायुसेना में शामिल करनातैयार विमानों को स्क्वाड्रन में शामिल कर ऑपरेशनल ड्यूटी पर रखा जाता है।
AMCA में न केवल स्टील्थ, बल्कि सुपरक्रूज़ (supercruise) क्षमता भी होगी। सामान्य तौर पर विमानों को ध्वनि की गति से तेज़ उड़ने के लिए आफ्टरबर्नर (afterburner) नामक अतिरिक्त ईंधन के उपयोग की आवश्यकता होती है, जो अधिक शोर और गर्मी पैदा करता है। सुपरक्रूज़ क्षमता का अर्थ है आफ्टरबर्नर के बिना भी लंबे समय तक ध्वनि की गति से अधिक तेज़ उड़ने की क्षमता। इससे विमान की रेंज बढ़ती है और दुश्मन के लिए इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इस विमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम भी होंगे जो पायलट को युद्ध के मैदान में त्वरित निर्णय लेने में मदद करेंगे।
वायुसेना के रोडमैप में स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ यानी लड़ाकू टुकड़ियों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। विकिपीडिया के इतिहास के अनुसार, 1947 में आज़ादी के समय भारत के पास 10 ऑपरेशनल स्क्वाड्रन थीं, जिनमें से 3 पाकिस्तान को दी गई थीं। समय के साथ यह संख्या बढ़ी थी, लेकिन वर्तमान में कई पुराने विमानों के सेवानिवृत्त होने के कारण स्क्वाड्रन की संख्या में कमी आई है। एयर चीफ मार्शल दीक्षित के अनुसार, तेजस के बड़े पैमाने पर उत्पादन और AMCA के विकास के द्वारा इस कमी को पूरा किया जाएगा। इसके लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अन्य निजी भागीदारों के साथ मिलकर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना है।

स्वदेशी फाइटर जेट के विकास की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। यह केवल एक इंजन और पंखों को जोड़ने का काम नहीं है, बल्कि इसमें हजारों सेंसर, सॉफ्टवेयर कोड और मजबूत धातुओं का मिश्रण होता है। तेजस के मामले में भारत ने फ्लाई-बाय-वायर (fly-by-wire) तकनीक विकसित की है, जिसमें विमान के नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के माध्यम से काम करते हैं। इससे विमान अधिक फुर्तीला बनता है। AMCA में इस तकनीक को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा, जिसमें सेंसर फ्यूजन (sensor fusion) होगा। सेंसर फ्यूजन का अर्थ है विमान के सभी सेंसरों से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़कर पायलट को आसपास की स्थिति का एक स्पष्ट चित्र प्रदान करना।
भारतीय वायुसेना न केवल युद्ध के लिए, बल्कि शांति के समय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विकिपीडिया के अनुसार, 1998 का चक्रवात, 2004 की सुनामी और 2013 की बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में वायुसेना ने बचाव कार्य किए हैं। ऑपरेशन विजय (गोवा मुक्ति) और ऑपरेशन मेघदूत (सियाचिन) जैसे सैन्य अभियानों में वायुसेना की भूमिका निर्णायक रही है। इन सभी कार्यों के लिए आधुनिक और स्वदेशी विमानों का होना आवश्यक है ताकि संकट के समय विदेशी स्पेयर पार्ट्स या तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े।
अंततः, तेजस और AMCA का रोडमैप केवल एक सैन्य आवश्यकता नहीं है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक है। एयर चीफ मार्शल दीक्षित के नेतृत्व में वायुसेना जिस तरह से स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता दे रही है, उससे आगामी दशक में भारत की आकाशीय सीमाएं और अधिक सुरक्षित हो जाएंगी। हालांकि, इस रोडमैप के कार्यान्वयन में समयसीमा बनाए रखना और बजट का प्रबंधन करना बड़ी चुनौतियां होंगी। फिर भी, भारतीय इंजीनियरों और वायुसेना के समन्वय से 'मेक इन इंडिया' के तहत तैयार होने वाले ये फाइटर जेट विश्व स्तर पर भारत की शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।


