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जेब में समा जाने वाला रिसीवर: रूसी ड्रोन के कैमरा फीड को लाइव हैक करने वाली यूक्रेन की नई SDR तकनीक

यूक्रेन की CODE380 कंपनी ने 'D·Vision SDR' नामक मात्र 290 ग्राम वजन का एक छोटा रिसीवर विकसित किया है, जो दुश्मन के ड्रोन वीडियो सिग्नल को रियल-टाइम में कैप्चर कर युद्धक्षेत्र में जासूसी को रोकता है।

आवतीकाल AI डेस्क3 नवंबर 2026 · 6 मिनट का पाठ
रेगिस्तानी जैसे क्षेत्र में सैनिक एक छोटे ड्रोन की मरम्मत और संचालन पर कार्य कर रहे हैं।
रेगिस्तानी जैसे क्षेत्र में सैनिक एक छोटे ड्रोन की मरम्मत और संचालन पर कार्य कर रहे हैं।
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युद्धभूमि पर डिजिटल जासूसी: क्या हुआ और क्यों है महत्वपूर्ण?

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में ड्रोन तकनीक का उपयोग अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गया है। इस आधुनिक युद्ध में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुश्मन का ड्रोन कहाँ जा रहा है और वह क्या देख रहा है? कीव (Kyiv) स्थित संचार उपकरण निर्माता कंपनी CODE380 ने इस प्रश्न का एक छोटा लेकिन अत्यंत प्रभावी समाधान खोज निकाला है। उन्होंने 'D·Vision SDR' नाम का एक छोटा रेडियो रिसीवर विकसित किया है जो जेब में समा सकता है।

यह छोटा उपकरण रूस के मानव रहित वाहनों (unmanned systems) यानी ड्रोन से प्रसारित होने वाले लाइव वीडियो फीड को बीच में ही पकड़ (intercept) लेता है। ड्रोन ऑपरेटरों के लिए युद्धक्षेत्र में अपने किट का वजन कम करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। D·Vision SDR रिसीवर ऑपरेटर के सामान में बहुत कम वजन जोड़ता है, जिससे सैनिक इसे आसानी से अपने साथ रख सकते हैं।

इस रिसीवर की मदद से यूक्रेनी ड्रोन टीम दुश्मन के उन ड्रोनों की जासूसी कर सकती है जो उन पर नजर रख रहे हों। दुश्मन का ड्रोन किस दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसका पायलट हमले से पहले किस पर निशाना साध रहा है, यह यूक्रेनी सैनिक अपनी स्क्रीन पर लाइव देख सकते हैं।

सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो (SDR) सर्किट बोर्ड, जो फ्रीक्वेंसी स्कैनिंग के लिए बुनियादी आधार प्रदान करता है।
सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो (SDR) सर्किट बोर्ड, जो फ्रीक्वेंसी स्कैनिंग के लिए बुनियादी आधार प्रदान करता है। (wdwd, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

वीडियो सिग्नल इंटरसेप्शन का विज्ञान: SDR तकनीक कैसे काम करती है?

इस तकनीक के केंद्र में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो (software-defined radio) या SDR तकनीक निहित है। पारंपरिक रेडियो रिसीवर में फ्रीक्वेंसी ट्यून करने के लिए हार्डवेयर सर्किट का उपयोग किया जाता है, जबकि SDR में यह पूरा कार्य सॉफ्टवेयर कोडिंग के माध्यम से होता है। इस कारण जब नए प्रकार के ड्रोन या नई स्पेसिफिकेशन सामने आते हैं, तो हार्डवेयर बदलने के बजाय केवल सॉफ्टवेयर अपडेट करके ही उपकरण को नए सिग्नल पहचानने में सक्षम बनाया जा सकता है।

इसे समझने के लिए एक सरल उदाहरण लेते हैं: जैसे आप खुले क्षेत्र में रेडियो सुनते हों और विभिन्न स्टेशनों को ट्यून करते हों, वैसे ही यह उपकरण हवा में तैरते रेडियो स्पेक्ट्रम (radio frequency spectrum) को निरंतर स्कैन करता है। यह उपकरण 500 मेगाहर्ट्ज़ (megahertz) से लेकर 8.7 गीगाहर्ट्ज़ (gigahertz) तक की विशाल फ्रीक्वेंसी रेंज में बिना किसी ब्लाइंड स्पॉट (blind spot) के स्कैनिंग करता है।

जब रूसी ड्रोन अपने कैमरे से नीचे के कंट्रोल स्टेशन पर एनालॉग वीडियो (analog video) भेजता है, तो वह सिग्नल सुरक्षित या एन्क्रिप्टेड (unencrypted) नहीं होता है। D·Vision SDR इस सिग्नल को पकड़कर तुरंत वीडियो में परिवर्तित कर देता है। 17 अक्टूबर को यूक्रेनी टेक आउटलेट DOU को दिए गए एक साक्षात्कार में डेवलपर्स ने बताया कि यह रिसीवर अन्य प्रतिस्पर्धी डिटेक्टर्स की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशीलता (sensitivity) रखता है।

D·Vision SDR द्वारा ड्रोन वीडियो इंटरसेप्ट करने की प्रक्रिया
  1. 1. फ्रीक्वेंसी स्कैनिंगSDR रिसीवर 500 MHz से 8.7 GHz की विशाल बैंडविड्थ में हवा में तैरते रेडियो तरंगों को लगातार स्कैन करता है।
  2. 2. अन-एनक्रिप्टेड सिग्नल पकड़नादुश्मन ड्रोन द्वारा प्रसारित एनालॉग वीडियो सिग्नल को बिना किसी ब्लाइंड स्पॉट के पकड़ लेता है।
  3. 3. वीडियो में रूपांतरणडिजिटल सॉफ्टवेयर द्वारा रेडियो फ्रीक्वेंसी डेटा को तुरंत लाइव वीडियो फीड में कन्वर्ट किया जाता है।
  4. 4. स्क्रीन पर डिस्प्लेयूक्रेनी ऑपरेटर अपने स्क्रीन पर दुश्मन के ड्रोन का लोकेशन और उसका टारगेट लाइव देख सकता है।

वजन, क्षमता और फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम: आंकड़ों की तुलना

Militarnyi में प्रकाशित निर्माता के आंकड़ों के अनुसार, D·Vision SDR रिसीवर 540 MHz से 6 GHz के बीच की फ्रीक्वेंसी पर 6 मील (10 किलोमीटर) तक की दूरी से एनालॉग वीडियो प्रदर्शित कर सकता है। इससे उच्च फ्रीक्वेंसी पर यह रेंज 2 से 3 मील (3.5 से 5 किलोमीटर) तक रह जाती है।

इस रिसीवर का आकार और वजन इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। D·Vision SDR का वजन मात्र 10 औंस यानी लगभग 290 ग्राम है। यूक्रेन में ही निर्मित इसके मुख्य प्रतिस्पर्धी उपकरणों की तुलना में यह वजन आधे से भी कम है। उदाहरण के लिए, Babai कंपनी का Vydun 7.5 रिसीवर लगभग 2 पाउंड (0.9 किलोग्राम) वजन का है और यह 7.5 GHz तक वीडियो इंटरसेप्ट कर सकता है। Contra-drone कंपनी का SENSE-4 उपकरण 21 औंस (600 ग्राम) वजन का है और यह 8.2 GHz तक पहुंचता है। वहीं BlueBird Tech का Chuyka 3.0 उपकरण 23 औंस (650 ग्राम) तक वजन रखता है, जिसे अब 8.8 GHz तक अपग्रेड किया जा सकता है।

FPV गॉगल्स पहनकर ड्रोन ऑपरेट कर रहे पायलट।
FPV गॉगल्स पहनकर ड्रोन ऑपरेट कर रहे पायलट। (Slakteriitis, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

जून 2026 से रूस के 'Molniya' नामक स्ट्राइक ड्रोन ने 4.1 से 4.5 GHz बैंड पर वीडियो भेजना शुरू किया था। यूक्रेन के राष्ट्रपति के रेडियो विशेषज्ञ और सलाहकार Serhii "Flash" Beskrestnov के अनुसार, अधिकांश पुराने डिटेक्टर इस फ्रीक्वेंसी को देख नहीं पाते हैं या बहुत कमजोर तरीके से देख पाते हैं। D·Vision SDR का कवरेज क्षेत्र इस फ्रीक्वेंसी बैंड को पूरी तरह से कवर करता है। जून महीने में Beskrestnov ने चेतावनी दी थी कि, "यदि आप डिटेक्टरों पर अंधविश्वास रखेंगे तो यह घातक सिद्ध हो सकता है।"

D·Vision SDR रिसीवर की तकनीकी विवरणनिर्माता CODE380 द्वारा घोषित आधिकारिक आंकड़े
विवरणक्षमता / आंकड़े
वजन290 ग्राम (10 औंस)
फ्रीक्वेंसी स्कैन रेंज500 MHz से 8.7 GHz
एनालॉग वीडियो रेंज (540 MHz - 6 GHz)6 मील (10 किमी)
एनालॉग वीडियो रेंज (उच्च फ्रीक्वेंसी)2 से 3 मील (3.5 से 5 किमी)
मोलनिया ड्रोन बैंड कवरेज4.1 से 4.5 GHz

पैसिव सेंसर्स और युद्ध की नई रणनीति

यह उपकरण एक पैसिव सेंसर (passive sensor) के रूप में कार्य करता है। सैन्य रणनीति में पैसिव सेंसर का महत्व बहुत अधिक है। रडार जैसे एक्टिव सेंसर अपने सिग्नल हवा में भेजते हैं, जिससे दुश्मन उनकी स्थिति आसानी से खोज सकता है और उन पर हमला कर सकता है। इसके विपरीत, पैसिव सेंसर किसी भी प्रकार का सिग्नल उत्सर्जित किए बिना केवल आसपास के रडार या रेडियो तरंगों को सुनता है।

D·Vision SDR जैसे सस्ते और निष्क्रिय सेंसर रडार, एकोस्टिक सेंसर्स और इंटरसेप्टर्स का स्थान लेने के बजाय उनके साथ मिलकर काम करते हैं। सैनिकों को अपनी स्थिति उजागर किए बिना दुश्मन के ड्रोन के खतरे का पहले ही पता चल जाता है।

युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला छोटा पोर्टेबल रेडियो डिवाइस।
युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला छोटा पोर्टेबल रेडियो डिवाइस। (Lance Cpl. Mast James, Public domain, Wikimedia Commons)

भविष्य की चुनौतियां: डिजिटल वीडियो और AI ड्रोन का खतरा

यह तकनीक अत्यंत उपयोगी होने के बावजूद इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। अधिकांश छोटे रिसीवर डिजिटल वीडियो (digital video) को डिकोड करने में असमर्थ होते हैं। इसके अतिरिक्त, मेविक (Mavic) संगत सिग्नलों को कुछ मील से अधिक दूरी से खोजने और फाइबर-ऑप्टिक (fiber-optic) केबल से चलने वाले ड्रोन को पकड़ने में यह प्रणाली विफल हो जाती है, क्योंकि केबल से नियंत्रित होने वाले ड्रोन हवा में कोई रेडियो तरंगें नहीं छोड़ते हैं।

सेरही बेस्क्रेस्तनोव के अनुसार, अब ऐसे ड्रोन वेरिएंट्स डिजाइन किए जा रहे हैं जिनके वीडियो फीड को हैक करना बहुत कठिन है। रूस के मोलनिया ड्रोन इसका एक उदाहरण हैं। अगस्त में द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मोलनिया ड्रोन Nvidia प्रोसेसर चिप्स का उपयोग करके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्वचालित मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं और वे हवा में कोई भी रेडियो सिग्नल उत्सर्जित नहीं करते हैं।

बेस्क्रेस्तनोव ने चेतावनी देते हुए लिखा कि, "हमें उस समय के लिए तैयार रहना होगा जब डिजिटल वीडियो पूरी तरह से एनालॉग का स्थान ले लेगा।" यदि ऐसा होता है, तो पोर्टेबल डिटेक्टर्स और फिक्स्ड एनालॉग रिसीविंग स्टेशन अप्रभावी हो जाएंगे। इसलिए, ड्रोन युद्धक्षेत्र में तकनीक की यह दौड़ निरंतर जारी रहेगी।

स्रोत

  1. defensenews.com
  2. TechCrunch
  3. Wikipedia

टेक

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वाहन के हुड पर स्थापित एक पोर्टेबल सैटेलाइट इंटरनेट टर्मिनल।

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