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अमेज़न वर्षा वन अब 'कार्बन सिंक' की जगह 'कार्बन उत्सर्जक' बना: पृथ्वी के फेफड़ों के लिए खतरे की घंटी

वैज्ञानिकों के हालिया अध्ययन के अनुसार, दुनिया का सबसे बड़ा जंगल अब वातावरण से कार्बन सोखने के बजाय अधिक कार्बन बाहर छोड़ रहा है, जो ग्लोबल वार्मिंग के लिए एक गंभीर संकेत है।

आवतीकाल AI डेस्क5 नवंबर 2026 · 7 मिनट का पाठ
अमेज़न नदी वर्षा वन से गुजरती हुई दिखाई देती है, जो पृथ्वी की सबसे बड़ी नदी प्रणाली और जैव विविधता का केंद्र है।
अमेज़न नदी वर्षा वन से गुजरती हुई दिखाई देती है, जो पृथ्वी की सबसे बड़ी नदी प्रणाली और जैव विविधता का केंद्र है।
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दुनिया के सबसे बड़े उष्णकटिबंधीय वर्षावन (tropical rainforest) के रूप में जाना जाने वाला अमेज़न, जिसे हम दशकों से 'पृथ्वी के फेफड़ों' के रूप में जानते आए हैं, अब एक भयावह परिवर्तन से गुजर रहा है। अब तक अमेज़न का जंगल वातावरण में मौजूद मानव-जनित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को सोखने का काम करता था, जिसे विज्ञान की भाषा में कार्बन सिंक (carbon sink) कहा जाता है। कार्बन सिंक यानी ऐसी प्राकृतिक व्यवस्था जो वातावरण से ग्रीनहाउस गैसों को सोख लेती है। लेकिन हाल के शोध बताते हैं कि यह विशाल जंगल अब कार्बन सोखने के बजाय वातावरण में अधिक कार्बन मुक्त कर रहा है। इसका अर्थ यह हुआ कि अमेज़न अब कार्बन सिंक न रहकर कार्बन उत्सर्जक (carbon emitter) या कार्बन स्रोत (carbon source) बन गया है।

सैटेलाइट द्वारा लिया गया अमेज़न वर्षा वन का दृश्य, जहां बादल और घनी वनस्पति देखी जा सकती है।
सैटेलाइट द्वारा लिया गया अमेज़न वर्षा वन का दृश्य, जहां बादल और घनी वनस्पति देखी जा सकती है। (NASA image courtesy Jeff Schmaltz, MODIS Rapid, Public domain, Wikimedia Commons)

यह चौंकाने वाला खुलासा 'The Hindu' की रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक दीर्घकालिक अध्ययन में हुआ है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2010 से 2024 के दौरान अमेज़न के चार मुख्य स्थानों पर अनुसंधान विमानों का उपयोग करके वातावरण के विभिन्न स्तरों पर कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर की माप की थी। इस अध्ययन में पाया गया कि अमेज़न क्षेत्र अब क्षेत्रीय मानव-जनित उत्सर्जन (anthropogenic emissions) की भरपाई करने के लिए पर्याप्त कार्बन नहीं सोख पा रहा है। मानव-जनित उत्सर्जन यानी ऐसी गतिविधियां जो मानव द्वारा की जाती हैं और जिनसे प्रदूषित गैसें पैदा होती हैं। इस परिवर्तन के पीछे मुख्य रूप से वनों की कटाई (deforestation) और जंगल में लगने वाली आग जिम्मेदार है।

कार्बन सिंक और कार्बन पूल का अंतर

इस प्रक्रिया को समझने के लिए कार्बन सिंक और कार्बन पूल (carbon pool) के बीच का अंतर समझना आवश्यक है। विकिपीडिया के डेटा के अनुसार, कार्बन पूल पृथ्वी पर वे सभी स्थान हैं जहां कार्बन का भंडारण हो सकता है, जैसे कि वातावरण, महासागर, मिट्टी, वनस्पति और जीवाश्म ईंधन के भंडार। जब यह पूल वातावरण से जितना कार्बन मुक्त करता है, उससे अधिक सोख लेता है, तब उसे कार्बन सिंक कहा जाता है। पृथ्वी पर मिट्टी और महासागर दो सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक कार्बन सिंक हैं। जंगलों में मौजूद पेड़ प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की प्रक्रिया द्वारा वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और उसे लकड़ी और पत्तियों में कार्बन के रूप में संग्रहित करते हैं।

अमेज़न बेसिन में विभिन्न देशों का हिस्सा (प्रतिशत में)ब्राज़ील सबसे बड़ा हिस्सा रखता है।
ब्राज़ील58.4%
पेरू12.8%
बोलिविया7.7%
कोलंबिया7.1%
वेनेज़ुएला6.1%
गयाना3.1%
सूरीनाम2.5%
इक्वाडोर1%

हालांकि, जब जंगलों को काटा जाता है या उन्हें जलाया जाता है, तब यह संग्रहित कार्बन फिर से वातावरण में मुक्त हो जाता है। अमेज़न में अभी यही प्रक्रिया बड़े पैमाने पर हो रही है। मिट्टी भी कार्बन भंडारण का एक बड़ा माध्यम है। वास्तव में, मिट्टी में मौजूद कार्बन पृथ्वी पर मौजूद सभी वनस्पतियों और वातावरण के संयुक्त कार्बन से भी अधिक होता है। लेकिन उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उच्च तापमान और भारी बारिश के कारण मिट्टी में मौजूद कार्बन का तेजी से ऑक्सीकरण (oxidation) हो जाता है, जिसके कारण वहां की मिट्टी लंबे समय तक कार्बन बनाए नहीं रख पाती है।

अमेज़न का भौगोलिक विस्तार और उसका महत्व

अमेज़न वर्षा वन दक्षिण अमेरिका के अमेज़न बेसिन में फैला हुआ है, जो कुल 70 लाख वर्ग किलोमीटर (7 million sq km) का क्षेत्र कवर करता है। इसमें से 60 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जंगलों से ढका हुआ है। यह विशाल क्षेत्र नौ देशों में फैला हुआ है, जिसमें ब्राज़ील सबसे बड़ा हिस्सा रखता है। विकिपीडिया के आंकड़ों के अनुसार, अमेज़न का 58.4% हिस्सा ब्राज़ील में, 12.8% पेरू में, 7.7% बोलिविया में और बाकी हिस्सा कोलंबिया, वेनेज़ुएला, गयाना, सूरीनाम, फ्रेंच गयाना और इक्वाडोर में स्थित है। इस जंगल में लगभग 390 अरब पेड़ हैं जो 16,000 से अधिक प्रजातियों में विभाजित हैं।

अमेज़न कार्बन सिंक से उत्सर्जक कैसे बना?
  1. कार्बन अवशोषणपेड़ प्रकाश संश्लेषण द्वारा वातावरण से CO2 सोखकर उसे लकड़ी और मिट्टी में संग्रहीत करते हैं।
  2. वनोन्मूलन और आगखेती और पशुपालन के लिए जंगलों को काटा जाता है या जलाया जाता है, जिससे संग्रहीत कार्बन मुक्त होता है।
  3. संतुलन बिगड़नाजब आग और नष्ट हुए पेड़ों से निकलने वाला कार्बन, जीवित पेड़ों द्वारा सोखे जाने वाले कार्बन से अधिक हो जाता है।
  4. कार्बन स्रोत बननाअंततः जंगल वातावरण में कार्बन घटाने के बजाय उसमें वृद्धि करना शुरू कर देता है।

अमेज़न का अस्तित्व कम से कम 5.5 करोड़ वर्षों से है। यह जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं है, बल्कि एक जटिल इकोसिस्टम (ecosystem) है जो पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। अमेज़न में वार्षिक औसत 9 फीट बारिश होती है। दिलचस्प बात यह है कि इस जंगल को उपजाऊ बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व हजारों किलोमीटर दूर स्थित सहारा के रेगिस्तान से आते हैं। नासा के CALIPSO सैटेलाइट के डेटा के अनुसार, हर साल सहारा रेगिस्तान से लगभग 18.2 करोड़ टन धूल हवा के जरिए उड़कर अटलांटिक महासागर पार करती है, जिसमें से 2.2 करोड़ टन धूल अमेज़न बेसिन में गिरती है। इस धूल में फास्फोरस (phosphorus) होता है, जो जंगल की वनस्पति के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

विनाश के कारण: आग और वनों की कटाई

अमेज़न जिस तरह से कार्बन उत्सर्जक बनता जा रहा है, उसके पीछे का सबसे बड़ा कारण मानवीय हस्तक्षेप है। 'The Hindu' की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में अमेज़न में हुई कुल वनों की कटाई में 38% हिस्सा जंगल में लगी आग का था। जब जंगल के बड़े हिस्से को खेती या पशुपालन के लिए साफ किया जाता है, तो वह न केवल कार्बन सोखने की क्षमता खो देता है, बल्कि संग्रहित कार्बन को धुएं के रूप में वातावरण में छोड़ देता है। इस प्रक्रिया के कारण जंगल के आसपास का तापमान बढ़ता है और बारिश की मात्रा घटती है, जिससे जंगल और अधिक शुष्क हो जाता है और आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

अमेज़न वर्षा वन के मुख्य आंकड़े
विवरणमाप/संख्या
कुल बेसिन क्षेत्र70 लाख वर्ग किमी
जंगल से ढका क्षेत्र60 लाख वर्ग किमी
अनुमानित पेड़ों की संख्या390 अरब
पेड़ों की प्रजातियां16,000
वार्षिक वर्षा9 फुट

वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि यदि वनों की कटाई इसी गति से जारी रही, तो अमेज़न एक 'टिपिंग पॉइंट' (tipping point) पर पहुंच जाएगा। टिपिंग पॉइंट यानी वह मोड़ जहां से वापस लौटना असंभव हो। यदि अमेज़न का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया, तो वह वर्षा वन न रहकर सवाना (savanna) यानी घास के मैदान में बदल जाएगा। इससे न केवल दक्षिण अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र पर बुरा असर पड़ेगा। ब्राज़ील में वनों की कटाई के कारण होने वाला आर्थिक नुकसान वहां के कृषि उत्पादन से होने वाले मुनाफे से सात गुना अधिक हो सकता है। इस स्थिति को वैज्ञानिक 'एग्रो-सुसाइड' (agro-suicide) यानी कृषि-आत्महत्या के रूप में परिभाषित करते हैं, क्योंकि जंगलों के विनाश से बारिश कम होगी और अंततः खेती ही असंभव हो जाएगी।

ब्राज़ील के अमेज़न क्षेत्र में वार्षिक पेड़ों के आवरण में हुई कमी का नक्शा।
ब्राज़ील के अमेज़न क्षेत्र में वार्षिक पेड़ों के आवरण में हुई कमी का नक्शा। (Yourecoveredinbees, CC BY 4.0, Wikimedia Commons)

मानव इतिहास और अमेज़न

अमेज़न के बारे में एक आम धारणा यह रही है कि यह हमेशा से एक अछूता प्राकृतिक जंगल रहा है। लेकिन पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि मनुष्य कम से कम 11,200 वर्षों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। विकिपीडिया के अनुसार, ईस्वी सन् 1500 के आसपास अमेज़न में लगभग 50 लाख लोग रहते थे। इन लोगों ने 'टेरा प्रेटा' (Terra preta) नाम की अत्यंत उपजाऊ काली मिट्टी बनाई थी, जो मानव-संचालित भूमि प्रबंधन का परिणाम थी। इसका अर्थ यह है कि अमेज़न का एक बड़ा हिस्सा सदियों तक मानवीय प्रबंधन के तहत रहा है और फिर भी वह समृद्ध बना रहा था।

वैश्विक कार्बन चक्र को समझाने वाली आकृति, जो दर्शाती है कि कार्बन कहां संग्रहीत होता है और कहां से मुक्त होता है।
वैश्विक कार्बन चक्र को समझाने वाली आकृति, जो दर्शाती है कि कार्बन कहां संग्रहीत होता है और कहां से मुक्त होता है। (Diagram adapted from U.S. DOE, Biological and, Public domain, Wikimedia Commons)

आज स्थिति अलग है। आधुनिक औद्योगीकरण और बड़े पैमाने पर ज़मीन हड़पने की गतिविधियों ने अमेज़न को खतरे में डाल दिया है। 20वीं सदी की शुरुआत में रबर के व्यवसाय के दौरान हज़ारों आदिवासियों की मौतें हुई थीं, और आज भी खनन और खेती के लिए जंगल काटे जा रहे हैं। अमेज़न का यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति की सहनशक्ति की भी एक सीमा होती है। यदि हम पृथ्वी के इस सबसे महत्वपूर्ण कार्बन सिंक को बचाना चाहते हैं, तो वनों की कटाई रोकना और जंगलों का पुनरुद्धार करना केवल दक्षिण अमेरिका के देशों की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ज़िम्मेदारी है।

निष्कर्ष में, अमेज़न का कार्बन उत्सर्जक बनना ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा झटका है। अब तक हम मानते थे कि जंगल हमारे प्रदूषण को सोख लेंगे, लेकिन अब जंगल खुद ही प्रदूषण का स्रोत बन रहे हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि यदि हमने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो प्राकृतिक चक्र इस तरह बदल जाएंगे कि उन्हें सुधारना इंसानों के बस में नहीं रहेगा।

स्रोत

  1. apps.apple.com
  2. the-hindu-science
  3. Wikipedia
  4. Wikipedia

विज्ञान

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