100% एथेनॉल ईंधन की आपूर्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए एथेनॉल आपूर्ति की रणनीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, सुबह 1:38 · अपडेट सुबह 10:40 · 5 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से यह सवाल किया है कि 100% एथेनॉल वाले ईंधन की आपूर्ति कैसे की जाएगी। कोर्ट ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह प्रश्न पूछा।
बेंच ने कहा, 'हमने कुछ अखबारों में पढ़ा है कि 100% एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को मंजूरी दी गई है।' कोर्ट ने आगे सैद्धांतिक रूप से जानने की इच्छा जताते हुए पूछा कि, यदि 100% एथेनॉल वाले वाहनों को अनुमति दी गई है, तो इसकी आपूर्ति कैसे की जाएगी? इस सवाल के जवाब में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि, इसके लिए उत्पादन व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव करने होंगे।
इस मामले में कोर्ट ने अगले महीने के लिए सुनवाई तय की है। सुनवाई के दौरान बेंच ने देश के किसानों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि, बड़े जनहित और पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी इस मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने आगे जोड़ा कि, देश की बड़ी आबादी किसानों के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण है और हमें किसानों को सशक्त बनाने का तरीका खोजना होगा, क्योंकि इस पहलू को कोई उजागर नहीं कर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि, हमें उस आम आदमी को सशक्त बनाना है जो अभी भी गांवों में रहता है।
इस मामले में एक वकील ने बताया कि एथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को किसी न किसी तरह मदद मिलेगी। एक अन्य वकील ने कहा कि इनमें से कुछ मुद्दों को केंद्र सरकार की नीति में शामिल किया गया है और केंद्र सरकार की नीति में किसानों के हित का पहलू भी शामिल है।
हाल ही में 26 अक्टूबर को, सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में बदलाव की अधिसूचना जारी की थी। इस बदलाव से E100 यानी लगभग शुद्ध एथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को मंजूरी मिली है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले कहा था कि इन बदलावों से उत्सर्जन प्रमाणन (एमिशन सर्टिफिकेशन) के प्रावधान अपडेट होंगे, जिसमें E85 के साथ E100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
हालांकि, पेट्रोल के संदर्भ में 27 अक्टूबर को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि, पेट्रोल में एथेनॉल 20% से अधिक बढ़ाने की केंद्र की कोई तत्काल योजना नहीं है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को E85 और E100 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलाने के लिए बनाया जाता है। E85 में 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है, जबकि E100 में लगभग 100% एथेनॉल होता है। इसके विपरीत, सामान्य पेट्रोल वाहनों को फिलहाल कम एथेनॉल मिश्रण के लिए मंजूरी मिली है।
केंद्र सरकार द्वारा 100% एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के उपयोग को मंजूरी दी गई है, जिससे क्रूड ऑयल का आयात और प्रदूषण घटने की संभावना है। ये वाहन पेट्रोल, डीजल, CNG या बैटरी के बिना चलेंगे, लेकिन इसका उपयोग केवल ऐसे वाहनों में ही किया जा सकेगा जिन्हें कंपनी ने विशेष रूप से E100 ईंधन के लिए बनाया हो। नए नियमों से ऐसी कारों के परीक्षण और उन्हें चलाने की मंजूरी पाने का रास्ता साफ हुआ है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट एक तेल मार्केटिंग कंपनी की याचिका पर भी सुनवाई कर रहा है। कंपनी का दावा है कि कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश से पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण करने की राष्ट्रीय नीति अस्थिर हो जाएगी। इससे पहले 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्देश को बरकरार रखने का आदेश दिया था, जिसमें ESY 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने के लिए कहा गया था।
हाईकोर्ट ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को एक प्रतिनिधित्व पर विचार करके निर्णय लेने का निर्देश दिया था। यह प्रतिनिधित्व एक एथेनॉल उत्पादक ने दिया था, जिसने ESY 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने गौर किया कि समर्पित एथेनॉल प्लांट्स सरकार की नीति के तहत स्थापित किए गए हैं और ये प्लांट्स अनुबंध के तहत केवल तेल मार्केटिंग कंपनियों को ही एथेनॉल आपूर्ति करने के लिए बाध्य हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे प्लांट्स को लॉन्ग-टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट में तय की गई प्राथमिकता वाले आवंटन का लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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