जॉर्ज गैलेस ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के खिलाफ ट्रंप का दस अरब डॉलर का मानहानि केस ठुकराया
ट्रंप ने जेफरी एप्सटीन संबंधित रिपोर्ट मामले में किया था दावा, कोर्ट ने कहा कि वास्तविक दूषितता साबित करने में प्रशासन असफल रहा है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 12:12 · अपडेट रात 8:23 · 5 मिनट का पाठ
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एसोसिएटेड प्रेस, बीबीसी और एनडीटीवी की रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार को अमेरिकी फेडरल जज ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' और मीडिया दिग्गज रूपर्ट मर्डोक के खिलाफ दस अरब डॉलर का मानहानि का मुकदमा खारिज कर दिया है। मियामी के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज डेरिन गैलेस ने इस केस को 'विचारों की दौड़ध भाग' बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति यह साबित करने में असफल रहे हैं कि कानून के मुताबिक प्रतिवादियों ने वास्तविक दूषितता के साथ मानहानिपूर्ण बयान जारी किए थे। इस केस को स्थायी रूप से यानी 'विथ प्रिज्युडिस' खारिज कर दिया गया है, जिसका अर्थ यह है कि अब यह केस फिर से दर्ज नहीं किया जा सकेगा।
इस मुकदमे में पहले पिछले साल उस रिपोर्ट का हवाला दिया गया था जिसमें धनी वित्तीय कारोबारी जेफरी एप्सटीन के 50वें जन्मदिन के अवसर पर तैयार किए गए एल्बम में ट्रंप का नाम शामिल होने वाला एक पत्र होने का दावा किया गया था। यह पत्र ब्रिटिश सोशियालाइट घिस्लेन मैक्सवेल द्वारा एकत्रित किया गया था, जो 2006 में एप्सटीन की पहली गिरफ्तारी से पहले और ट्रंप के साथ संबंध बिगड़ने से पहले की घटना है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र के पाठ को एक हस्तलिखित नग्न स्त्री के आकार की रूपरेखा द्वारा फ्रेम किया गया था और उसमें 'जन्मदिन की शुभकामनाएं - और हर दिन दूसरा एक अद्भुत रहस्य बना रहे' जैसे शब्द शामिल थे। डॉनल्ड ट्रंप ने इस पत्र को लिखने से इंकार किया था और इस कहानी को झूठा, दूषित और मानहानिजनक बताया था।
बीबीसी और सीबीसी न्यूज की रिपोर्टों के मुताबिक, जज डेरिन गैलेस ने 20-पृष्ठ के अपने फैसले में कहा कि यह मुकदमा जर्नल की जांचात्मक रिपोर्टों में खामियां पैदा करने का प्रयास था। इससे पहले अप्रैल महीने में भी जज ने यह मुकदमा खारिज कर दिया था और ट्रंप को संशोधित शिकायत दर्ज करने का अवसर दिया था, जिसके हिस्से के रूप में ट्रंप की टीम ने मई में संशोधित दावा पेश किया था। हालांकि, ताजा फैसले में जज ने 1964 के सुप्रीम कोर्ट के 'न्यू यॉर्क टाइम्स को. बनाम सुलिवन' के सीमाचिह्न रूपी केस को उद्धृत करते हुए कहा कि सार्वजनिक हस्तियों के लिए मानहानि के मुकदमे जीतना मुश्किल होता है क्योंकि उन्हें यह साबित करना पड़ता है कि मीडिया संस्था जानबूझकर कोई असत्य प्रकाशित करती है या सत्य के प्रति लापरवाही बरतती है।
जज ने अपने आदेश में नोट करके बताया कि संशोधित शिकायत वास्तविक दूषितता की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में असफल रही है। न्यायाधीश ने यह भी नोट किया कि जर्नल की रिपोर्ट ने ट्रंप के इनकार को नजरअंदाज या कम नहीं किया, बल्कि पाठकों को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पत्र को फर्जी बताकर इसे लिखने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। जज ने कहा कि यदि ऐसा कानून बनाया जाए कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति के इनकार मात्र से पत्रकारों को नकारात्मक समाचार छापने से रोका जा सके, तो वह अमेरिकी स्वतंत्रता के विरुद्ध जाएगा।
इससे पहले एनडीटीवी और अन्य माध्यमों की रिपोर्टों के मुताबिक, हाउस ओवरसाइट कमेटी द्वारा गत वर्ष एप्सटीन को भेजी गई इस कथित जन्मदिन की नोट की नकल भी प्रकाशित की गई थी। इस प्रकरण में ट्रंप के समर्थकों का मानना है कि 'डीप स्टेट' के एलिट वर्ग द्वारा सेक्स रिंग के सहयोगियों को बचाया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने महीनों तक न्याय विभाग को 'एप्सटीन फाइलें' बाहर जारी करने से रोकने के लिए संघर्ष किया था, लेकिन आखिरकार उन्हें संसद द्वारा पारित किए गए कानून पर हस्ताक्षर करने पड़े थे। इन दस्तावेजों में ट्रंप का नाम बार-बार दिखाई देता है, लेकिन उन्होंने सभी गड़बड़ियों से इनकार किया है और इस प्रकरण से जुड़े किसी आपराधिक आरोपों का सामना नहीं करना पड़ा है। नवंबर के यूएस मिडटर्म चुनावों से पहले डेमोक्रेट्स द्वारा एप्सटीन-संबंधित विज्ञापनों के पीछे 35 मिलियन डॉलर से अधिक का खर्च किए जाने की रिपोर्ट है।
इस केस के अलावा, डॉनल्ड ट्रंप का प्रशासन और ट्रंप खुद बीबीसी, एसोसिएटेड प्रेस और अन्य माध्यम संस्थाओं के साथ मुकदमों एवं व्हाइट हाउस से कुछ पत्रकारों को प्रतिबंधित करने जैसे विवादों में भी संलिप्त हैं। हाल के दिनों में मिलिट्री सेमेटेरी के बाहर एक विशाल कमांड आर्च बनाने की योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा के दावों को लेकर भी अदालतों में केस दर्ज हुए हैं। जर्नल के मुकदमे को खारिज करने का यह निर्णय ट्रंप और उनके प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका माना जाता है, जो अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान न्यूज संस्थाओं के साथ लगातार संघर्ष में रहे हैं।
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