नासा का स्विफ्ट टेलीस्कोप पृथ्वी के वातावरण में प्रविष्ट हुआ, इंडोनेशिया के ऊपर जलकर नष्ट हुआ
22 वर्षों तक ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने वाली 1450 किलोग्राम वजन की वेधशाला पृथ्वी पर गिरी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 12:57 · अपडेट सुबह 1:12 · 5 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
नासा का प्रसिद्ध स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप अंततः पृथ्वी पर वापस आ गया है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, 4 नवंबर 2026 को पूर्वी समय के अनुसार सुबह 7:39 बजे यह वेधशाला उत्तरी सुमात्रा के ऊपरी वातावरण में प्रविष्ट हुई। यह टेलीस्कोप पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते ही जलकर नष्ट हो गया। इस वेधशाला का वजन लगभग 1450 किलोग्राम था और इसका आकार एक मिनीबस के बराबर था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 1.5 टन वजन की इस वेधशाला के पुन: प्रवेश के दौरान इसके मलबे के भारत पर गिरने की संभावना थी।
नासा के अनुसार, टेलीस्कोप का अधिकांश हिस्सा वातावरण में प्रवेश करते ही जल गया। किसी व्यक्ति या वस्तु को नुकसान पहुँचने की संभावना मात्र 2100 में 1 जितनी बहुत कम थी। इस वेधशाला का पतन अनियंत्रित था क्योंकि इसे बचाने के प्रयास विफल रहे थे। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 22 वर्षों तक ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद करने वाले इस सैटेलाइट टेलीस्कोप की यात्रा अब समाप्त हो गई है।
स्विफ्ट टेलीस्कोप नवंबर 2004 में लॉन्च किया गया था। प्रारंभ में इसका मूल मिशन समय केवल दो वर्ष का था, जिसमें मुख्य रूप से ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोट माने जाने वाले गामा-रे बर्स्ट का अध्ययन करना था। यह वेधशाला अपनी अत्यधिक गति के लिए जानी जाती थी। जब भी किसी बर्स्ट की जानकारी मिलती, यह एक मिनट के भीतर अपने टेलीस्कोप को उस दिशा में घुमा सकती थी। इसी गति के कारण इसका नाम 'स्विफ्ट' रखा गया था, जिसका अंग्रेजी में अर्थ तीव्र पक्षी होता है। वर्ष 2018 में, इस वेधशाला का नाम बदलकर इसके पहले मुख्य वैज्ञानिक नील गेह्रल्स के नाम पर 'नील गेह्रल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' कर दिया गया था।
हालाँकि इसका मिशन समय केवल दो वर्ष का था, लेकिन स्विफ्ट ने दो दशकों से अधिक समय तक कार्य किया। इस अवधि के दौरान इसने 2000 से अधिक गामा-रे बर्स्ट और 1400 से अधिक सुपरनोवा विस्फोटों का अध्ययन किया। इसके अलावा, इसने दूरस्थ ब्लैक होल, क्षुद्रग्रह और धूमकेतु जैसी कई खगोलीय घटनाओं पर महत्वपूर्ण डेटा प्रदान किया। वैज्ञानिकों का मानना है कि स्विफ्ट ने त्वरित प्रतिक्रिया वाली टिप्पणियों के महत्व को साबित किया और खगोल भौतिकी के क्षेत्र में क्रांति ला दी। इसने कुल 7000 के करीब शोध कार्यों में सहयोग दिया।
स्विफ्ट के पास अपना कोई थ्रस्टर नहीं था, जिसके कारण वायुमंडलीय घर्षण के प्रभाव से यह धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर खिंच रहा था। जैसे-जैसे इसकी ऊंचाई घटती गई, पतन की प्रक्रिया तेज होती गई। इस टेलीस्कोप को बचाने के लिए नासा ने सितंबर 2025 में एरिज़ोना की कंपनी 'कैटालिस्ट स्पेस' के साथ 30 मिलियन डॉलर का अनुबंध किया था। इस कंपनी ने 'लिंक' नामक एक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट तैयार किया था, जिसे जुलाई में लॉन्च किया गया था। अगस्त महीने में इस लिंक स्पेसक्राफ्ट द्वारा स्विफ्ट को पकड़कर पुनः उच्च कक्षा में ले जाने की योजना थी।
लेकिन, यह बचाव अभियान विफल रहा क्योंकि लिंक स्पेसक्राफ्ट के प्रोपल्शन सिस्टम और रिएक्शन व्हील्स में खराबी आ गई थी। परिणामस्वरूप, लिंक स्वयं 25 सितंबर को पृथ्वी पर गिर गया। नासा ने इस प्रयास को उच्च जोखिम वाला लेकिन महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि इससे सैटेलाइट सर्विसिंग तकनीक में प्रगति हुई और भविष्य में अन्य सैटेलाइट्स को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सबक मिले। स्विफ्ट ने अपना अंतिम वैज्ञानिक अवलोकन 20 अक्टूबर को पूरा किया था।
अंतरिक्ष के मलबे का पृथ्वी पर गिरना कोई असामान्य घटना नहीं है। प्रतिदिन औसतन तीन बड़े अंतरिक्ष मलबे पृथ्वी पर गिरते हैं। भविष्य में जब सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ेगी, तो यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाएगी। स्विफ्ट ने साबित किया कि यदि मिशन का डिज़ाइन अच्छा हो, तो वह निर्धारित समय सीमा से काफी अधिक समय तक कार्य कर सकता है। यह घटना अंतरिक्ष कचरे के प्रबंधन और सैटेलाइट्स के जीवनकाल को बढ़ाने वाली तकनीक की आवश्यकता पर जोर देती है। इंडोनेशिया से कुछ वीडियो क्लिप भी सामने आए हैं जिनमें स्विफ्ट के जलते हुए अवशेष दिखाई दे रहे हैं।
स्विफ्ट एक नासा वेधशाला थी जिसने ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों, ब्लैक होल और सुपरनोवा जैसे खगोलीय रहस्यों का अध्ययन किया। इसे 2004 में लॉन्च किया गया था और यह 22 वर्षों तक कार्यरत रहा।
बस किराए में वृद्धि के खिलाफ मैसूर में किसानों ने लगाया सड़क जाम
स्टेट शुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में किसानों ने सबअर्बन बस स्टैंड के सामने विरोध प्रदर्शन किया
नवी मुंबई शिफ्टिंग के बहाने 10 गल्फ एयरलाइंस के स्लॉट खारिज
अदाणी ग्रुप द्वारा संचालित एयरपोर्ट से 14 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को नवी मुंबई स्थानांतरित करने की योजना
બે ચક્રવાતોથી થયેલા નુકસાન માટે આંધ્રપ્રદેશ ભાજપે કેન્દ્રની મદદ માંગી
રાજ્ય ભાજપ પ્રમુખે ગૃહમંત્રી અમિત શાહને પત્ર લખીને નુકસાનના પુનઃમૂલ્યાંકન અને રાહતની માંગ કરી છે