डिजिटल जनगणना 2027 में रियल-टाइम में डेटा सुधार करने के लिए राज्यों को निर्देश
डेटा की गुणवत्ता सुधारने और खामियों को दूर करने के लिए सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 10:25 · 3 मिनट का पाठ
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भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (RG&CCI) ने सभी राज्यों को जनगणना 2027 के जनगणना चरण के दौरान डेटा संग्रह की प्रगति पर रियल-टाइम में नज़र रखने के निर्देश दिए हैं। इससे अधिकारी डेटा की गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं की पहचान कर सकेंगे और समय पर सुधारात्मक कदम उठा सकेंगे। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पहले जनगणना कागजों पर की जाती थी, इसलिए ऐसे तत्काल सुधार संभव नहीं थे, लेकिन 2027 की जनगणना पहली बार डिजिटल डेटा संग्रह का उपयोग करेगी।
30 अक्टूबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और जनगणना संचालन निदेशकों (DCO) को भेजे गए पत्र में RG&CCI मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) इस प्रक्रिया के लिए मुख्य मंच होगा। इस प्रणाली का उपयोग योजना बनाने, पर्यवेक्षण, प्रशिक्षण, प्रबंधन, फील्ड कर्मचारियों की नियुक्ति और समस्याओं के समाधान के लिए किया जाएगा।
उन्होंने पत्र में आगे कहा कि CMMS के माध्यम से उपलब्ध जानकारी की नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि पिछड़ रहे क्षेत्रों, परिचालन संबंधी बाधाओं, कवरेज में खामियों, नियुक्ति संबंधी समस्याओं, प्रशिक्षण की कमी और डेटा की गुणवत्ता जैसे कारकों की पहचान की जा सके, जो जनगणना पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। CMMS की रिपोर्टों और निगरानी उपकरणों के माध्यम से समय पर सुधारात्मक कार्रवाई, पर्यवेक्षी हस्तक्षेप और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी समन्वय संभव हो सकेगा।
जनगणना के इस दूसरे चरण के लिए, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा जैसे चुनावी राज्यों में घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने की प्रक्रिया 1 दिसंबर से शुरू होगी। लद्दाख के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में यह प्रक्रिया 30 सितंबर को पूरी हो चुकी है। देश के बाकी हिस्सों में यह अभियान 25 जनवरी, 2027 से शुरू होगा।
इस चरण के दौरान गणना करने वाले 40 प्रश्न पूछेंगे, जिनमें 13 नए प्रश्न शामिल हैं जो पहली बार पूछे जाएंगे। इन नए प्रश्नों में अनुसूचित जाति/जनजाति के अलावा अन्य जाति, धर्म, माता-पिता का जन्मस्थान और जन्मतिथि, बैंक खातों की संख्या, जीवनसाथी का नाम, राष्ट्रीयता, डिजिटल साक्षरता, स्थायी निवास का पता, कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, पासपोर्ट नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता के साथ-साथ मोबाइल, आधार और वॉटर आईडी नंबर (यदि उपलब्ध हो) शामिल हैं।
द हिंदू ने 4 जून की रिपोर्ट में बताया था कि जनगणना के पहले हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन के दौरान उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गणना करने वालों को खुले में शौच और बिजली या रसोई गैस कनेक्शन जैसी बातों में डेटा की विसंगतियों को सुधारने के लिए दोबारा घरों का दौरा करने के लिए कहा गया था।
पूरे देश में लगभग 34 लाख गणना करने वाले तैनात किए जाएंगे, जिनमें अधिकांश सरकारी स्कूल के शिक्षक होंगे। उन्हें गणना ब्लॉक (EBs) सौंपे जाएंगे, जिसमें प्रत्येक ब्लॉक में लगभग 700 से 800 लोग होंगे। RG&CCI ने पत्र में स्पष्ट किया कि केवल ब्लॉकों की प्रगति पर ही नहीं, बल्कि फील्ड कर्मचारियों के प्रदर्शन, पर्यवेक्षी जांच की पूर्णता, घरों और जनसंख्या के कवरेज, शेष फील्ड गतिविधियों और डेटा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। निगरानी ढांचे का उपयोग केवल प्रगति जानने के लिए ही नहीं, बल्कि संभावित जोखिमों की भविष्यवाणी करने और पहले से निवारक उपाय करने के लिए भी किया जाएगा।
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