स्कॉच विस्की के टैरिफ विवाद पर सरकार मंडली कंपनियों के साथ बैठक करेगी
बल्क स्कॉच आयात पर टैरिफ कटौती को लेकर विदेशी और स्थानीय कंपनियों के बीच चर्चा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
31 अक्टूबर 2026, शाम 7:22 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारत सरकार बल्क स्कॉच आयात पर टैरिफ कटौती से जुड़े विवाद के संदर्भ में शराब बनाने वाली कंपनियों के साथ बातचीत करेगी। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को वाणिज्य मंत्रालय के उच्च अधिकारी विदेशी और स्थानीय शराब कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बंद कमरे में यह चर्चा करेंगे। यह विवाद भारत और यूके के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते से जुड़ा हुआ है, जो जुलाई महीने में लागू हुआ था।
नई दिल्ली ने बड़ी कंपनियों को बताया है कि बल्क स्कॉच आयात को उस टैरिफ कटौती के लिए पात्र नहीं माना जाएगा, जिसे समझौते के अनुसार १५० प्रतिशत से घटाकर ७५ प्रतिशत कर दिया गया था। इस फैसले के कारण डियाजियो और पर्नोड जैसी बड़ी विदेशी कंपनियों के साथ-साथ भारतीय कंपनियों ने चिंता व्यक्त की है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन से होने वाले स्कॉच का लगभग ८० प्रतिशत आयात बल्क में किया जाता है, जिसका उपयोग स्थानीय स्तर पर उत्पादन के लिए होता है।
इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, जो पर्नोड और डियाजियो का प्रतिनिधित्व करती है, उसने निजी तौर पर नई दिल्ली को चेतावनी दी है कि बल्क स्कॉच आयात को बाहर रखने के कदम से व्यापार समझौता कमजोर पड़ सकता है। इसके अलावा, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) भी इस विरोध में शामिल हो गई है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, २७ अक्टूबर को सरकार को लिखे गए एक गुप्त पत्र में CIABC ने स्थानीय उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में चेतावनी दी है।
CIABC के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि भारत में उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले बल्क स्कॉच को कम टैरिफ के लिए पात्र नहीं रखा जाएगा, तो इससे तैयार उत्पादों का आयात करने के लिए अवांछनीय प्रोत्साहन मिल सकता है। पत्र में आगे जोड़ा गया है कि ऐसा परिणाम 'मेक इन इंडिया' के तहत स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने के उद्देश्य के विपरीत होगा। अतः, कंपनियों ने किसी भी प्रकार के व्यवधान से बचने के लिए सरकार के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
CIABC के सदस्यों में लिस्टेड भारतीय कंपनियां जैसे कि 8पीएम ब्रांड बनाने वाली राडिको खेतान और ऑफिसर्स चॉइस बनाने वाली एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स शामिल हैं। एलाइड ब्लेंडर्स द्वारा इस हफ्ते एक इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में बताया गया था कि वे 'बल्क स्कॉच के सबसे बड़े आयातकों में से एक' हैं और यूके समझौता उनके 'लक्जरी पोर्टफोलियो की सुलभता' में सुधार करेगा। सभी कंपनियों ने कहा है कि वे कानून का पालन करती हैं।
भारत के ६५ अरब डॉलर के अल्कोहल उद्योग को उम्मीद थी कि टैरिफ में कमी होने से व्यवसाय में वृद्धि होगी। स्कॉच विस्की के टैरिफ वर्षों तक चली भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के दौरान मुख्य मुद्दा रहे थे, जिसमें भारत अंततः कुछ स्कॉच आयातों पर टैक्स आधा करने के लिए सहमत हुआ था। ब्रिटेन ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर भारत के साथ काम कर रहे हैं और स्कॉटिश सरकार ने भी बल्क स्कॉच के व्यवहार को लेकर नई दिल्ली के साथ बात की है। हालांकि, भारत द्वारा इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
आयात टैरिफ विवाद लंबे समय से विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय रहे हैं, जो बड़े पैमाने पर बैक टैक्स की मांग का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि वे केवल देश के कानून का क्रियान्वयन कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को कामकाज के घंटों के बाद इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
યુપીના ખેડૂતો હવે વિમાન માટે હાઇડ્રોજનનું ઉત્પાદન કરશે તેમ ગડકરીનું નિવેદન
કેન્દ્રીય મંત્રી નીતિન ગડકરીએ જણાવ્યું કે ખેતીના કચરા અને પાણીમાંથી હાઇડ્રોજન બનાવીને વિમાન, કાર અને ટ્રેનો ચલાવવામાં આવશે.
बिहार के सरकारी स्कूलों में 2026-27 से कक्षा 1 और 2 में क्षेत्रीय भाषाएं आएंगी
मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है
गया एयरपोर्ट पर 10 किलो गांजे के साथ दो महिलाएं पकड़ी गईं
थाईलैंड से आई दोनों महिलाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग ₹10 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं।