सुप्रीम कोर्ट पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं
दिल्ली सरकार और CAQM को आदेशों का पालन न करने पर कोर्ट ने लगाई फटकार
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, सुबह 12:52 · 7 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंधों के कार्यान्वयन में विफलता के लिए दिल्ली सरकार और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को कड़ी फटकार लगाई। हालांकि, कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना कोई समाधान नहीं है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस साल दिवाली के दौरान दिल्ली-NCR में सीमित समय के लिए और निर्धारित दिनों में ग्रीन पटाखों की बिक्री और फोड़ने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन नई अंतरिम व्यवस्था को लेकर आदेश कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर 2025 में त्योहार के लिए दी गई तीन दिन की छूट एक बार का कदम था, जिसे स्वतः नहीं बढ़ाया जा सकता। इस साल दिवाली 8 नवंबर को है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने दिवाली के जश्न से जुड़ी जन भावनाओं के बारे में बात की, लेकिन जोर देकर कहा कि अधिकारी त्योहार के उत्साह का उपयोग पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने में विफलता के लिए बहाने के रूप में नहीं कर सकते। बेंच ने अवलोकन किया कि, "हम भी जन भावनाओं को समझते हैं। कोई जश्न मनाना चाहता है। इसलिए, हम पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते क्योंकि इससे अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लेकिन फिर भी, कृपया हमें इस मामले में बहुत कड़ा रुख अपनाने के लिए मजबूर न करें।" कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि वे लोगों को दिवाली मनाने से नहीं रोकना चाहते, लेकिन यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पटाखों का उपयोग जिम्मेदारी से और स्वीकृत समय अवधि के दौरान ही हो। कोर्ट ने सुझाव दिया कि अधिकारियों को निर्धारित दिनों के दौरान कार्यान्वयन के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, भले ही इसके लिए उन्हें नियमों का पालन कराने के लिए चालान काटने पड़ें, लाइसेंस रद्द करने पड़ें या उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़े।
कोर्ट ने सरकार से आदेशों के कार्यान्वयन को लेकर सख्त सवाल पूछे। बेंच ने पूछा, "पिछले साल हमारे आदेश के बाद, आपने वास्तव में क्या किया? देखिए, अन्यथा आदेश पारित करने और सभी शर्तें रखने का कोई मतलब नहीं है, जब तक कि आप वास्तव में जमीन पर इसका कार्यान्वयन न करें। तब तो यह एक मजाक बन जाएगा।" कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अंतरिम आदेश देने से कोई असर नहीं होगा यदि कार्यान्वयन पद्धति प्रभावी न हो। जस्टिस सुंदरेश ने कड़े शब्दों में कहा कि, "मुझे लगता है कि हमारे आदेशों का उल्लंघन अधिक होता है। हम कार्यान्वयन के कदमों के बारे में जानना चाहते हैं - कानूनी कार्रवाई, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है... हर साल हम आदेश पारित करते हैं और उनका पालन नहीं होता... चलिए हम सजग हो जाएं... हम अगले साल यहां नहीं होंगे।"
जनता में बदलाव लाने के लिए कोर्ट ने नवीन और रचनात्मक तरीकों को अपनाने का सुझाव दिया। कोर्ट ने सुझाव दिया कि प्रदूषण के प्रति जागरूकता लाने के लिए विराट कोहली जैसे प्रसिद्ध खिलाड़ियों या जीवन के अन्य क्षेत्रों के सम्मानित व्यक्तियों की मदद लेनी चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसी प्रसिद्ध हस्तियों द्वारा वीडियो या संदेश रिकॉर्ड कराए जा सकते हैं, जिसमें वे लोगों से प्रदूषण बढ़ाए बिना दिवाली मनाने की अपील करें। इसके अलावा, कोर्ट ने स्कूलों में इस मामले पर शिक्षा देने के लिए शैक्षणिक अधिकारियों को निर्देश देने का विचार भी पेश किया। कोर्ट ने अवलोकन किया कि दिवाली मूल रूप से प्रकाश का त्योहार है और प्रकाश का जश्न मनाने के लिए पटाखों की आवश्यकता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पर्यावरण और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गईं। एडवोकेट उत्तरा बब्बर के अनुसार, पटाखे फोड़ने से बड़ी मात्रा में खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (PM) निकलते हैं, जो मानव शरीर में जाकर फेफड़ों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले हफ्ते दशहरा के दौरान दिल्ली-NCR में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में वृद्धि हुई थी और बाजार में बिकने वाले पटाखे वास्तव में ग्रीन पटाखे हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। वहीं, एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन द्वारा यह तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई आदेश दिए हैं लेकिन उनका उल्लंघन हो रहा है, इसलिए पटाखों के उत्पादन पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के मुद्दे पर भी चर्चा की। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने CSIR-NEERI की सिफारिश के आधार पर ग्रीन पटाखों के लिए सीमित और सशर्त छूट देने के संबंध में नोट पेश किया। इस नोट के अनुसार, इन विशेष पटाखों की अनुमति तभी दी जा सकती है जब उनका उत्पादन केवल लाइसेंस प्राप्त निर्माताओं द्वारा किया जाए और उनमें प्रतिबंधित केमिकल्स न हों। हालांकि, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ग्रीन पटाखों के उपयोग से प्रदूषण में कमी आती है, ऐसे सबूत पिछले वर्षों में नहीं मिले हैं। 30 सितंबर को भी कोर्ट ने कहा था कि वह पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाएगा लेकिन 24 घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति भी नहीं देगा, इसलिए बीच का रास्ता निकालना जरूरी है।
दिवाली के दौरान प्रदूषण के स्तर को लेकर आंकड़े चिंताजनक हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के विश्लेषण के अनुसार, 2025 में दिवाली के दौरान दिल्ली में 2021 के बाद का सबसे खराब प्रदूषण दर्ज किया गया था। मॉनिटरिंग स्टेशनों के डेटा के अनुसार, दिवाली की रात औसत PM2.5 सांद्रता 785.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर थी, जो AQI 812 के समकक्ष थी, जबकि आधिकारिक तौर पर AQI की सीमा 500 है। इस संदर्भ में, कोर्ट ने सरकार को चीनी पटाखों की बिक्री के बारे में विस्तृत जानकारी देने और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण पेश करने को कहा।
कोर्ट ने नई पीढ़ी और बच्चों के महत्व पर भी जोर दिया। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी थोड़ी संशयवादी है, जबकि पुरानी पीढ़ी जश्न मनाना चाहती है। यदि बच्चों को पटाखों से होने वाले प्रदूषण के नुकसान के बारे में ठीक से समझाया जाए, तो वे खुद ही अपने माता-पिता को पटाखे न फोड़ने के लिए कह सकते हैं। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दिवाली के साथ लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं, लेकिन इन भावनाओं के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और संविधान द्वारा मिले अधिकारों का भी ध्यान रखना चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि वे इन निर्देशों का पालन करने में विफल रहे, तो कोर्ट को कड़ा रुख अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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